सहजन यानी मोरिंगा: पोषक तत्वों का पावरहाउस, जिसके हर हिस्से में छिपे हैं सेहत के राज जीवनशैली 2 घंटे पहले 3
सहजन न केवल एक स्वादिष्ट सब्जी है, बल्कि इसे एक सुपरफूड माना जाता है जिसके फूल, पत्तियां और छाल सभी स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। जानें कि क्यों आयुर्वेद और पोषण विशेषज्ञ इसे आहार में शामिल करने की सलाह देते हैं।

सहजन: पोषण का असली खजाना

सहजन, जिसे आम बोलचाल में मुनगा और अंग्रेजी में ड्रमस्टिक कहा जाता है, स्वास्थ्य के लिहाज से किसी वरदान से कम नहीं है। वैज्ञानिक भाषा में इसे मोरिंगा के नाम से जाना जाता है। आमतौर पर लोग इसे केवल एक सब्जी के रूप में जानते हैं, लेकिन वास्तव में यह एक ऐसा सुपरफूड है, जिसका हर हिस्सा—फल, फूल, पत्तियां और यहां तक कि छाल भी—गुणों से भरपूर है। कई स्थानों पर सहजन की खेती साल में दो बार की जाती है, जिससे यह लंबे समय तक पोषण का स्रोत बना रहता है।

पौष्टिक तत्वों से भरपूर

पलामू के आयुर्वेद विशेषज्ञ शिव कुमार पांडे के अनुसार, सहजन की पत्तियों में शरीर के लिए आवश्यक प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और आयरन जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसे पोषण की दृष्टि से एक अति उत्तम खाद्य पदार्थ माना जाता है। यदि इसे नियमित और संतुलित आहार में सही तरीके से शामिल किया जाए, तो यह शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों को काफी हद तक पूरा कर सकता है।

पाचन और स्वास्थ्य में भूमिका

सहजन की फलियों और पत्तियों में मौजूद फाइबर की मात्रा इसे पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद बनाती है। फाइबर हमारे दैनिक आहार का एक अनिवार्य हिस्सा है, जो पेट को साफ रखने और पाचन क्रिया को सुचारू बनाने में सहायक होता है। भारतीय घरों में इसकी फलियों की सब्जी, फूलों के पकौड़े और पत्तियों की भुजिया पारंपरिक व्यंजनों के रूप में सालों से बनाई जाती रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आप इसे ज्यादा तेल में तलकर या डीप फ्राई करके खाते हैं, तो इसके औषधीय लाभ काफी हद तक कम हो जाते हैं। इसलिए इसे पकाने का सही तरीका अपनाना जरूरी है।

आयुर्वेद में महत्व और सावधानियां

आयुर्वेद की पुरानी चिकित्सा पद्धतियों में सहजन के विभिन्न अंगों का उपयोग सदियों से किया जा रहा है। इसके पत्ते, फूल और छाल का उपयोग कई घरेलू नुस्खों में किया जाता है। अक्सर यह माना जाता है कि यह रक्तचाप, रक्त शर्करा, त्वचा संबंधी समस्याओं और जोड़ों के दर्द में राहत दिला सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि वैज्ञानिक रूप से इसे किसी भी बीमारी के लिए पूर्ण या रामबाण इलाज के रूप में स्वीकार नहीं किया गया है। इसे चमत्कारी औषधि मानने के बजाय एक पौष्टिक आहार के रूप में देखना अधिक तर्कसंगत है।

सेवन से पहले बरतें सावधानी

भले ही सहजन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है, लेकिन इसका सेवन करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है। विशेष रूप से वे लोग जो किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, नियमित रूप से दवाएं ले रहे हैं, या जो गर्भवती महिलाएं हैं, उन्हें अपनी डाइट में सहजन के चूर्ण, अर्क या पत्तियों का औषधीय मात्रा में सेवन करने से पहले हमेशा एक योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। बिना चिकित्सकीय परामर्श के किसी भी चीज को औषधि के रूप में उपयोग करना हानिकारक हो सकता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए सहजन को एक पौष्टिक भोजन की तरह अपनाना ही समझदारी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप