उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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अयोध्या में राम मंदिर CEO के लिए मंथन शुरू
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए पहले पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी CEO को नियुक्त करने की कवायद तेज हो गई है। इस पद के लिए उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया के दौरान पूछे गए सवालों ने चर्चा छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, साक्षात्कार के दौरान उम्मीदवारों से केवल उनकी प्रशासनिक क्षमता ही नहीं, बल्कि उनके निजी जीवन, खान-पान और धार्मिक निष्ठा को लेकर भी गहन सवाल किए गए। इस दौरान उनसे यह भी जानने की कोशिश की गई कि क्या वे हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने में सहज हैं या नहीं।
40 से 50 मिनट तक चले कड़े सवाल-जवाब
सूत्रों ने बताया कि इंटरव्यू की प्रक्रिया काफी विस्तृत रही और हर उम्मीदवार का साक्षात्कार लगभग 40 से 50 मिनट तक चला। पैनल ने इस दौरान यह जानने का प्रयास किया कि उम्मीदवारों की भगवान राम में कितनी आस्था है। इंटरव्यू में शामिल किए गए कुछ मुख्य सवालों में यह पूछा गया कि क्या आवेदक शिखा रखते हैं, क्या वे जनेऊ धारण करते हैं, क्या वे मांसाहारी भोजन का सेवन करते हैं और क्या वे शराब का सेवन करते हैं। इसके साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या वे मंदिर की मर्यादा के अनुसार पारंपरिक हिंदू वेशभूषा पहनने में सहज महसूस करेंगे।
पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी दिखाई रुचि
इस महत्वपूर्ण पद के लिए देश भर से बड़ी संख्या में आवेदन आए थे। चयन प्रक्रिया के पहले चरण में 5200 आवेदकों में से 18 उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया था। इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS के पूर्व अधिकारी, भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS के पूर्व अधिकारी और सेना के रिटायर्ड सैन्य अधिकारी भी शामिल हैं। मंगलवार को हुई साक्षात्कार प्रक्रिया में पूर्व आईपीएस अधिकारी राजेश पांडेय और जौनपुर के पूर्व जिलाधिकारी दिनेश चंद्र ने हिस्सा लिया। इसके अलावा पूर्व आईएएस अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा और समीर पांड्या भी इस दौड़ में प्रमुखता से शामिल हैं।
साक्षात्कार का पहला दिन और आगे की योजना
ट्रस्ट के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, चुने गए 18 उम्मीदवारों में से पहले दिन कुल 8 लोगों का साक्षात्कार पूरा किया गया। पहले यह उम्मीद थी कि पूरी प्रक्रिया दो दिनों में निपट जाएगी, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि यह प्रक्रिया चार दिन और जारी रह सकती है। सभी उम्मीदवार सोमवार रात ही अयोध्या पहुंच गए थे और उन्हें ट्रस्ट द्वारा तय की गई अलग-अलग जगहों पर ठहराया गया था। साक्षात्कार की यह पूरी प्रक्रिया अयोध्या स्थित राम मंदिर के तीर्थयात्री सुविधा केंद्र के सम्मेलन कक्ष में संचालित की जा रही है।
सीईओ की नियुक्ति की आवश्यकता क्यों पड़ी?
राम मंदिर में चढ़ावे और प्रबंधन से जुड़ी कुछ अनियंत्रित घटनाओं और चोरी के आरोपों के बाद ट्रस्ट ने पूर्णकालिक सीईओ नियुक्त करने का ठोस निर्णय लिया था। इसी उद्देश्य से एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया है जो इन 18 उम्मीदवारों का मूल्यांकन कर रही है। समिति में उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हवारे शामिल हैं।
अंतिम चयन की प्रक्रिया
साक्षात्कार प्रक्रिया को लेकर बेहद गोपनीयता बरती जा रही है। उम्मीदवारों को मीडिया से किसी भी तरह की बातचीत न करने का सख्त निर्देश दिया गया है। सूत्रों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद, साक्षात्कार समिति 18 आवेदकों में से तीन नाम शॉर्टलिस्ट करेगी। इन तीन नामों को अंतिम निर्णय के लिए मंदिर ट्रस्ट के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद ही किसी एक नाम पर मुहर लगेगी। साक्षात्कार खत्म होने के बाद सभी उम्मीदवारों को वापस अयोध्या हवाई अड्डे ले जाया जाएगा, जहां से वे अपने गंतव्य के लिए दिल्ली की फ्लाइट लेंगे।
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