छत्तीसगढ़
एक घंटा पहले
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छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर है। राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भाषा ज्ञान को सुधारने के लिए एक बड़ी कार्ययोजना लागू करने जा रही है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने इस संबंध में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार का मुख्य ध्यान अब बच्चों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने पर होगा, ताकि वे शुरुआती स्तर से ही भाषा में मजबूत हो सकें।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि पहली से आठवीं कक्षा तक बच्चों को आसानी से पास करने की जो पुरानी व्यवस्था लागू थी, उसका सीधा असर बच्चों के पढ़ने और लिखने की क्षमता पर पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर भाषा सुधारने के लिए विशेष नियम लागू किए जा रहे हैं।
प्राथमिक में हिंदी और माध्यमिक स्तर पर अंग्रेजी पर रहेगा जोर
नए नियमों के अनुसार, अब कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों के लिए हिंदी बोलना और लिखना पूरी तरह से अनिवार्य किया जाएगा। वहीं, माध्यमिक स्तर यानी कक्षा छठवीं से आठवीं तक के बच्चों को अंग्रेजी बोलने और लिखने में सक्षम बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी निजी स्कूलों के बच्चों की तरह दोनों भाषाओं में पूरी तरह निपुण हो सकें।
शिक्षकों की ट्रेनिंग और लापरवाही पर कार्रवाई की तैयारी
इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए सबसे पहले प्रदेशभर के सरकारी शिक्षकों को अंग्रेजी भाषा का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस ट्रेनिंग के बाद ही शिक्षक बच्चों को नए तरीके से अंग्रेजी सिखाएंगे। शिक्षा मंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी स्कूल के बच्चे एक तय स्तर तक भाषा का कौशल हासिल नहीं कर पाते हैं, तो इसके लिए सीधे तौर पर वहां के शिक्षकों को जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है।
शिक्षकों की बंपर भर्ती और पुरानी व्यवस्थाओं में सुधार
स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य के आत्मानंद स्कूलों को और बेहतर बनाने के लिए 5,000 संविदा शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इन संविदा शिक्षकों का चयन पूरी तरह से ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से पारदर्शी तरीके से होगा। इसके साथ ही, 5,000 नियमित शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन पहले ही जारी किया जा चुका है।
एक और बड़ा सुधार डिजिटल तकनीक के जरिए देखने को मिला है। स्कूलों में ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था लागू होने के बाद प्रशासनिक और अन्य कार्यालयों में संबद्ध किए गए करीब 10,600 शिक्षक वापस अपनी मूल पोस्टिंग यानी स्कूलों में लौट आए हैं। वर्तमान में राज्य के लगभग 85 प्रतिशत शिक्षक ऑनलाइन माध्यम से अपनी हाजिरी दर्ज करा रहे हैं।
विवेकानंद योजना से दोबारा शुरू होंगे इग्नाइट स्कूल
बंद होने की कगार पर पहुंच चुके इग्नाइट स्कूलों को बचाने के लिए सरकार ने नया फॉर्मूला निकाला है। इन स्कूलों को अब विवेकानंद योजना के तहत दोबारा शुरू किया जाएगा। इन स्कूलों का संचालन सार्वजनिक निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर किया जाएगा और यहां बच्चों को अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने की सुविधा मिलती रहेगी। इसके अलावा, सरकार का लक्ष्य आगामी दिसंबर महीने तक सभी स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध कराने का है। जिन सुदूर स्कूलों में शिक्षकों की कमी होगी, वहां बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए ऑनलाइन कक्षाओं के जरिए सिलेबस पूरा कराया जाएगा।
मूल्यांकन व्यवस्था में बदलाव: दूसरे स्कूल के शिक्षक जांचेंगे कॉपियां
शिक्षा के स्तर में सुधार और निष्पक्षता लाने के लिए परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव किया जा रहा है। अब बोर्ड परीक्षाओं को छोड़कर अन्य सभी स्थानीय कक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन दूसरे स्कूलों के शिक्षकों से कराया जाएगा। इस कदम से कॉपियों की जांच में पूरी पारदर्शिता आएगी और बच्चों के सही ज्ञान का सटीक आकलन हो सकेगा। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने विश्वास जताया है कि सरकार द्वारा किए जा रहे इन नए प्रयोगों का सकारात्मक असर अब ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।
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