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एक घंटा पहले
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वर्ल्ड बैंक की फटकार से पाकिस्तान की शर्मिंदगी
पाकिस्तान के सत्ता के गलियारों से एक बेहद शर्मनाक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। शहबाज शरीफ की सरकार और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर पर अपने ही देश के सबसे गरीब और बेबस लोगों के हक का पैसा छीनने का गंभीर आरोप लगा है। यह मामला बलूचिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद पुनर्वास के लिए वर्ल्ड बैंक से मिली वित्तीय सहायता से जुड़ा है। वर्ल्ड बैंक ने बलूचिस्तान के बाढ़ पीड़ितों को घर उपलब्ध कराने के लिए जो धन जारी किया था, उसे पाकिस्तान सरकार ने बिना अनुमति के कहीं और ही ठिकाने लगा दिया। इस धोखाधड़ी का खुलासा वर्ल्ड बैंक के एक सख्त पत्र से हुआ है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की फजीहत कर दी है।
बाढ़ पीड़ितों की मदद पर शहबाज और मुनीर का डाका
बलूचिस्तान में जब बाढ़ ने तबाही मचाई थी, तो लाखों परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए थे। इन बेघर लोगों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से वर्ल्ड बैंक ने एक बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। योजना बहुत स्पष्ट थी, बाढ़ से जिनके घर तबाह हुए, उन्हें वित्तीय सहायता देकर फिर से आशियाना बनाने में मदद की जाए। लेकिन शहबाज शरीफ की सरकार और पर्दे के पीछे से पूरी कमान संभाल रहे सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की नजरें बलूचिस्तान के इस फंड पर टिकी थीं। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने इस राशि को वर्ल्ड बैंक की सहमति के बिना ही अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में डायवर्ट कर दिया। सरल शब्दों में कहें तो बाढ़ पीड़ितों के नसीब का पैसा छीनकर उसे सरकार की मनपसंद योजनाओं की भेंट चढ़ा दिया गया।
वर्ल्ड बैंक की कड़ी चेतावनी और कड़क पत्र
पाकिस्तान की इस चालाकी और वित्तीय अनियमितता पर वर्ल्ड बैंक ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है। विश्व बैंक की कंट्री डायरेक्टर बोलोरमा अमगाबाजार ने पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के सचिव, संघीय योजना सचिव और बलूचिस्तान के मुख्य सचिव को एक बेहद कड़क पत्र भेजा है। बैंक ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि पाकिस्तान सरकार का यह मनमाना फैसला न केवल खतरनाक है, बल्कि पूरी तरह से अनुचित भी है। वर्ल्ड बैंक के डेटा के अनुसार, इस हाउसिंग योजना के 84 प्रतिशत लाभार्थी समाज के सबसे कमजोर और अत्यंत गरीब तबके से आते हैं।
- 28% परिवारों की आय: इनकी मासिक कमाई 30 डॉलर यानी करीब 2500 रुपये से भी कम है।
- 26% परिवारों की आय: इनकी मासिक आय 31 से 70 डॉलर के बीच सिमटी हुई है।
- 8% परिवार: ये छोटे किसान हैं जो पूरी तरह से मौसम और जमीन पर निर्भर हैं।
- 39% परिवार: ये लोग किराए के घरों में रहते हैं।
- 37% परिवार: ये दिहाड़ी मजदूर हैं जो अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए संघर्ष करते हैं।
इन गरीब परिवारों के पास न तो कोई बचत है और न ही भविष्य में बैंक से कर्ज लेने की क्षमता। शहबाज-मुनीर की जोड़ी ने बलूच जनता के इसी एकमात्र सहारे को छीनकर उन्हें गहरे संकट में डाल दिया है।
1.19 लाख परिवारों को मिला धोखा
वर्ल्ड बैंक के आधिकारिक पत्र से यह खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान सरकार ने 22 जून 2026 तक पहले चरण में केवल 62,966 लाभार्थियों को ही घर बनाने के लिए मदद दी। इसके अलावा, सब्सिडी के दायरे को केवल 97,000 परिवारों तक सीमित कर दिया गया। इसका खौफनाक परिणाम यह हुआ कि 1,19,049 ऐसे परिवार, जो पहले से सत्यापित (वेरीफाइड) थे और पात्रता की सभी शर्तों को पूरा करते थे, उन्हें बिना किसी कारण के इस सूची से बाहर कर दिया गया। ये वे लोग हैं जिन्होंने तमाम दस्तावेजों पर दस्तखत किए थे और उम्मीद लगाए बैठे थे कि उन्हें जल्द ही पक्का घर मिलेगा, लेकिन शासन की इस मनमानी ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया।
66 हजार से अधिक शिकायतें दर्ज
पाकिस्तानी समाचार पत्र 'दॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने वर्ल्ड बैंक के साथ किसी भी प्रकार की साझा संचार रणनीति बनाए बिना ही इस कटौती की घोषणा कर दी। इस एकतरफा फैसले से बलूचिस्तान के हजारों गांवों में भारी आक्रोश और डर का माहौल फैल गया है। वर्तमान स्थिति यह है कि परियोजना के शिकायत निवारण पोर्टल पर रातों-रात 66,120 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। पीड़ित परिवार अब यह सवाल कर रहे हैं कि उनका वेरिफिकेशन होने के बावजूद उन्हें मदद से वंचित क्यों किया गया? वर्ल्ड बैंक ने अब कड़ा रुख अपनाते हुए पाकिस्तान सरकार को निर्देश दिया है कि वह हर एक शिकायतकर्ता को लिखित जवाब दे और इस पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड बैंक के साथ साझा करे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
भुखमरी और कर्ज के दलदल में धकेला
वर्ल्ड बैंक ने केवल वित्तीय अनियमितता की बात नहीं की, बल्कि शहबाज और मुनीर के इस फैसले से होने वाले मानवीय दुष्प्रभावों को भी उजागर किया है। सरकार की इस नीति ने गरीब परिवारों को और अधिक मुश्किलों में डाल दिया है:
- शिक्षा और स्वास्थ्य पर संकट: जिन गरीबों के पास घर के लिए पैसे नहीं हैं, वे अब अपने बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च काटकर कच्चे मकानों की मरम्मत में पैसा लगाने को मजबूर होंगे।
- कर्ज का जाल: कई परिवार अपनी छोटी-मोटी संपत्तियां या मवेशी बेचने को मजबूर होंगे, या फिर सूदखोरों से भारी ब्याज पर कर्ज लेने के लिए विवश होंगे।
- भविष्य का खतरा: सुरक्षा के अभाव में ये परिवार आने वाली बाढ़, गर्मी और तूफानों के दौरान मौत के साए में जीने को मजबूर होंगे।
बलूचिस्तान में विद्रोह की आशंका
बलूचिस्तान में पहले से ही पाकिस्तानी सरकार और सेना के खिलाफ गहरा अविश्वास और गुस्सा व्याप्त है। बलूच जनता का हमेशा से यह मानना रहा है कि पंजाब और इस्लामाबाद में बैठे हुक्मरान उनके प्राकृतिक संसाधनों को लूटते हैं और उन्हें बदले में सिर्फ बर्बादी मिलती है। बाढ़ पीड़ितों का हक मारकर शहबाज-मुनीर सरकार ने जलती आग में घी डालने का काम किया है। वर्ल्ड बैंक ने भी अपने पत्र में संकेत दिया है कि सत्यापित लाभार्थियों को बाहर करने से भेदभाव की भावना बढ़ेगी, जिससे बलूचिस्तान में सामाजिक तनाव और विद्रोह की आग और भड़क सकती है। यह घटना स्पष्ट करती है कि इस्लामाबाद में बैठी शहबाज सरकार और जनरल मुनीर को बलूच लोगों की जान-माल की कोई परवाह नहीं है।
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