उपनाम: आयुर्वेद
सुपारी की आदत है तो चबाएं ये काली चीज, पाचन और ओरल हेल्थ के लिए है जादुई औषधि
आयुर्वेद में हरड़ को एक गुणकारी औषधि माना गया है जो पाचन सुधारने और मुंह की सेहत बनाए रखने में सहायक है। भोजन के बाद इसका सीमित मात्रा में सेवन कई स्वास्थ्य लाभ दे सकता है, बशर्ते आप इसे सही तरीके से इस्तेमाल करें।
त्योहारों में ज्यादा खा लिया? तेजी से वजन घटाने के लिए डॉ. ने सुझाए ये 5 आयुर्वेदिक उपाय
त्योहारों के दौरान अनियंत्रित खान-पान से बढ़े वजन को कम करने के लिए आयुर्वेदिक डॉक्टर वीके पांडे ने 5 विशेष ड्रिंक्स का सुझाव दिया है जो शरीर को डिटॉक्स करने में मददगार हैं।
हाथ-पैर सुन्न होने की समस्या से हैं परेशान? काले तिल का तेल बन सकता है रामबाण इलाज
हाथ-पैर सुन्न होने की दिक्कत को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, आप कुछ आसान घरेलू उपायों और मालिश से इस स्थिति में राहत पा सकते हैं।
अपराजिता चाय बनाने की आसान विधि और इसके जबरदस्त स्वास्थ्य लाभ
अपराजिता के फूलों से तैयार होने वाली चाय मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद गुणकारी है, इसे घर पर बनाना बेहद सरल है।
नीम गिलोय के चमत्कारी आयुर्वेदिक लाभ: इम्युनिटी बढ़ाने से पाचन सुधारने तक, जानें सेवन का सही तरीका
आयुर्वेद में नीम गिलोय को एक अत्यंत प्रभावशाली औषधीय बेल माना गया है जो स्वास्थ्य के लिए कई तरह से लाभकारी है। हालांकि, इसे किसी बीमारी का पूर्ण इलाज मानने के बजाय एक सहायक औषधि के रूप में ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
बरसात के मौसम में खान-पान को लेकर रहें सावधान, इन गलतियों से बिगड़ सकता है आपका पाचन
मौसम बदलते ही हमारा पाचन तंत्र काफी संवेदनशील हो जाता है, ऐसे में गलत आहार का चुनाव स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को न्योता दे सकता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान खान-पान में किन चीजों का ध्यान रखना चाहिए, आइए जानते हैं।
लाल दूधी पौधा: खुजली और त्वचा रोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है यह जंगली वनस्पति
बरसात के मौसम में खेतों और बगीचों में आसानी से मिलने वाली लाल दूधी त्वचा संबंधी कई समस्याओं के इलाज में बेहद असरदार मानी जाती है।
मानसून में डैंड्रफ की समस्या का कारण और समाधान, क्या रोज बाल धोना है सही?
बारिश के मौसम में नमी और पसीने के कारण बालों में डैंड्रफ की परेशानी आम हो जाती है। आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छता बनाए रखना जरूरी है लेकिन अत्यधिक धुलाई बालों के लिए हानिकारक हो सकती है।
गुड़हल के फायदे: बालों का झड़ना होगा बंद और स्किन की खुजली भी होगी छूमंतर, ऐसे करें उपयोग
गुड़हल का फूल न केवल शोभा बढ़ाता है, बल्कि यह आयुर्वेद में स्वास्थ्य और सौंदर्य के लिए एक अचूक औषधि माना गया है। बालों और त्वचा की समस्याओं में यह रामबाण इलाज साबित हो सकता है।
डेंगू में प्लेटलेट्स गिरने पर क्या वाकई सिर्फ कीवी ही एकमात्र उपाय है? जानिए आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह और बचाव के सही तरीके
डेंगू के मौसम में प्लेटलेट्स कम होने पर अक्सर लोग घबराकर महंगे फल जैसे कीवी की तरफ भागते हैं। अंबाला के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए केवल कीवी ही नहीं, बल्कि कई अन्य घरेलू और पौष्टिक आहार भी बेहद प्रभावी हैं।
पहाड़ों की इन खास पत्तियों में छिपा है सेहत का खजाना, सर्दी-खांसी से लेकर तनाव तक में हैं फायदेमंद
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पाई जाने वाली चीड़ की पत्तियां औषधीय गुणों से भरपूर होती हैं, जो इम्युनिटी बढ़ाने और संक्रमण से लड़ने में मदद करती हैं। इनका उपयोग पारंपरिक रूप से सर्दी-जुकाम और मानसिक शांति के लिए किया जाता रहा है।
रक्षाबंधन पर खूब मिठाई खा ली है तो शरीर को डिटॉक्स करना है जरूरी, घर पर ही तैयार करें ये 5 खास ड्रिंक
त्योहारों के दौरान अधिक मिठाई और खानपान के बाद शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए आयुर्वेद विशेषज्ञों ने 5 जादुई पेय पदार्थों का सुझाव दिया है। ये ड्रिंक्स वजन कम करने और सूजन घटाने में बेहद प्रभावी माने जाते हैं।
सर्दी, सिरदर्द और साइनस से पाना है छुटकारा, तो अपनाएं घी, कपूर और सरसों तेल का यह अचूक घरेलू नुस्खा
झारखंड की राजधानी रांची में सर्दी और साइनस की समस्या से राहत पाने के लिए घी, कपूर और सरसों के तेल का एक खास मिश्रण काफी लोकप्रिय है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुराना नुस्खा स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है।
घर के आंगन में तुलसी लगाने की परंपरा के पीछे क्या हैं वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण?
भारत में घरों के आंगन में तुलसी लगाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जो केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि स्वच्छता और स्वास्थ्य से भी गहरे स्तर पर जुड़ी हुई है।
सामान्य घास समझने की भूल न करें, सेहत के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जंगली पुदीना
ग्रामीण अंचलों में आसानी से मिलने वाला जंगली पुदीना जिसे गंधेली भी कहा जाता है, औषधीय गुणों से भरपूर है। गोंडा के वैद्य के अनुसार यह चोट और घाव भरने में बेहद कारगर है।