स्वास्थ्य
एक घंटा पहले
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साबूदाना और हार्ट हेल्थ पर डॉक्टर का नजरिया
भारत में व्रत और उपवास के दौरान साबूदाना का सेवन बड़े पैमाने पर किया जाता है। सावन जैसे त्योहारों में साबूदाने से बनी खिचड़ी, खीर, टिक्की और वड़ा जैसे व्यंजन काफी पसंद किए जाते हैं। लेकिन जो लोग हृदय संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए साबूदाने को लेकर संशय बना रहता है। साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक डॉ. बिमल छाजेर ने इस विषय पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने अपने हालिया वीडियो में बताया है कि साबूदाने की पोषण संबंधी प्रोफाइल क्या है और इसे दिल के मरीजों को कितनी मात्रा में लेना चाहिए।
साबूदाने में मौजूद पोषक तत्वों की सच्चाई
डॉ. बिमल छाजेर के मुताबिक, साबूदाना मूल रूप से एक प्रकार का स्टार्च है। यह पचने में तो काफी आसान होता है, लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से इसमें पोषक तत्वों की काफी कमी रहती है। साबूदाने में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का अभाव होता है, साथ ही इसमें फैट की मात्रा भी शून्य होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत या कमी यह है कि इसमें कैलोरी और कार्बोहाइड्रेट का स्तर बहुत अधिक पाया जाता है। अच्छी बात यह है कि साबूदाना खाने से शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है, और यह शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करने में सक्षम है।
क्या दिल के रोगियों को साबूदाना खाना चाहिए?
डॉक्टर छाजेर का स्पष्ट मानना है कि साबूदाना दिल के लिए हानिकारक नहीं है, लेकिन इसे बहुत अधिक फायदेमंद भी नहीं माना जा सकता। चूँकि इसमें पोषक तत्वों की कमी होती है, इसलिए यह स्वास्थ्य के लिए कोई विशेष लाभ नहीं देता। चूंकि साबूदाने में कोलेस्ट्रॉल नहीं होता, इसलिए यह ब्लॉकेज नहीं बढ़ाता है। हालांकि, हृदय रोगियों को यह ध्यान रखना चाहिए कि साबूदाने में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर का वजन बढ़ा सकता है। यदि आपका वजन पहले से ज्यादा है और ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित है, तो आपको साबूदाने के सेवन से बचना चाहिए।
हार्ट पेशेंट्स के लिए सुरक्षित तरीका
अगर आपको साबूदाना खाना बहुत पसंद है, तो डॉक्टर बिमल छाजेर कुछ टिप्स देते हैं। इसे सेहतमंद बनाने के लिए आप इसमें ढेर सारी सब्जियां जैसे गाजर, शिमला मिर्च या प्रोटीन के लिए दालें मिला सकते हैं, जिससे इसके पोषण में सुधार हो सके। हालांकि, ध्यान रखें कि साबूदाना कभी भी ज्वार, रागी या बाजरा जैसे साबुत अनाजों का स्थान नहीं ले सकता। हृदय रोगियों को इसे अपनी नियमित डाइट में शामिल करने के बजाय, तभी खाना चाहिए जब उन्हें इसकी बहुत ज्यादा इच्छा हो।
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