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एक घंटा पहले
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सूर्य ग्रहण के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां
इस वर्ष का दूसरा सूर्य ग्रहण ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रहण को लेकर हमारी धार्मिक परंपराओं और ज्योतिषीय मान्यताओं में कई तरह के नियमों और सावधानियों का जिक्र मिलता है। ग्रहण काल के दौरान सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने और नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए कुछ विशेष कार्यों को करने या उनसे परहेज करने की सलाह दी जाती है। इन नियमों में सूर्य को नग्न आंखों से न देखना और भोजन बनाने जैसे कार्यों से दूर रहना प्रमुख है।
सूर्य ग्रहण का समय और खगोलीय स्थिति
यह महत्वपूर्ण खगोलीय घटना 12 अगस्त को घटित हो रही है। इस दौरान सूर्य कर्क राशि में स्थित है और ग्रहण के समय चंद्रमा भी कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं। भारतीय समय के अनुसार, इस सूर्य ग्रहण का स्पर्शकाल आज रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगा। वहीं, इस ग्रहण का मोक्ष काल आज देर रात 1 बजकर 28 मिनट पर समाप्त होगा। इस प्रकार, इस सूर्य ग्रहण की कुल अवधि 4 घंटे 24 मिनट की रहेगी।
ग्रहण काल के दौरान क्या न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय निम्नलिखित कार्यों से बचना चाहिए:
- सूर्य को सीधी नग्न आंखों से बिल्कुल न देखें और कोशिश करें कि ग्रहण के दौरान घर से बाहर न निकलें।
- रसोई से जुड़े कार्यों से परहेज करें। विशेष रूप से ग्रहण के दौरान खाना पकाने से बचना चाहिए।
- गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और घर के भीतर ही रहना चाहिए।
- सुई में धागा डालने जैसे बारीक या नुकीले काम करने से बचें।
- सब्जियां काटने या किसी वस्तु को छीलने का काम ग्रहण काल में वर्जित माना गया है।
- भोजन में तड़का लगाने या छौंक बघारने की प्रक्रिया से बचें।
- ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं, इसलिए मूर्ति पूजा या दीपक प्रज्वलित करने का कार्य न करें।
मंत्र जप का महत्व
ग्रहण के समय पूजा करने के बजाय मन ही मन भगवान का ध्यान करना और मंत्रों का जाप करना श्रेष्ठ माना जाता है। मान्यता है कि तेज आवाज में मंत्रोच्चार करने से ग्रहण की नकारात्मकता का प्रभाव व्यक्ति पर नहीं पड़ता है। आप सूर्यदेव के इन मंत्रों का जप कर सकते हैं:
- ॐ ह्रां ह्रीं हौं स सूर्याय नमः
- ऊँ घृणिः सूर्याय नमः
ग्रहण के बाद अपनाएं ये उपाय
ग्रहण समाप्त होने के बाद घर की पूरी तरह से साफ-सफाई करना आवश्यक है। घर के सभी कोनों और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें। इसके अलावा मंदिर में रखी देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और चित्रों को भी गंगाजल से शुद्ध करना चाहिए। ग्रहण के उपरांत दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है, इसलिए अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान अवश्य करें और गौ माता को हरा चारा खिलाएं। गर्भवती महिलाओं को सलाह दी जाती है कि ग्रहण के मोक्ष के बाद स्नान जरूर करें।
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