उपनाम: धान की खेती
धान की नर्सरी में अपनाएं ये खास तरीका, मजबूत पौध और बंपर पैदावार के साथ शानदार होगा बीजों का अंकुरण
खरीफ सीजन में धान की स्वस्थ नर्सरी तैयार करने के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह — सही खाद, संतुलित नमी और समय पर खरपतवार नियंत्रण से बीजों का जमाव बेहतर होता है और पौधे मजबूत बनते हैं।
धान की खेती हुई आसान: सीधी बुवाई करने वाली ये दो मशीनें घटाएंगी मजदूरी और बढ़ाएंगी मुनाफा
अब धान की खेती में नर्सरी, रोपाई और भारी मजदूरी की जरूरत घट रही है। सुपर सीडर और जीरो टिलेज सीड ड्रिल एक ही बार में बुवाई पूरी कर पानी, डीजल, समय और श्रम की बचत करा रही हैं।
40 नहीं पूरे 200 रुपये किलो! पलामू में इस खास चावल ने बदल दी किसानों की किस्मत
झारखंड के पलामू जिले में किसान काला नमक किरण धान की खेती अपनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं, जिसका सुगंधित चावल बाजार में 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।
किसान ध्यान दें! पत्ती लपेटक कीट चट कर सकता है पूरा धान का खेत, अपनाएं 'लेफ्ट राइट' तकनीक
धान रोपाई के तुरंत बाद पत्ती लपेटक कीट पौधों की पत्तियों को खाकर उनकी बढ़त रोक देता है। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार रस्सी से लेफ्ट राइट तकनीक अपनाकर और खेत में पानी भरकर इस कीट पर काबू पाया जा सकता है।
छोटा कीट, बड़ा खतरा: पत्ता लपेटक ने धान की नर्सरी को बनाया निशाना, समय रहते अपनाएं ये उपाय
धान की नर्सरी तैयार होते ही पत्ता लपेटक (लीफ फोल्डर) कीट कोमल पत्तियों को मोड़कर उनके भीतर छिप जाता है और पौधों का हरा भाग चट कर जाता है। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक के अनुसार समय पर जैविक और रासायनिक उपाय अपनाकर पूरी पौध को बचाया जा सकता है।
धान की सीधी बुवाई: न रोपाई की मेहनत, न पानी की बर्बादी, किसानों को मिलेगा बंपर मुनाफा
खरीफ सीजन में किसान पारंपरिक रोपाई छोड़कर धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) अपना रहे हैं, जिससे पानी, लागत और मजदूरी में बचत होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक बुवाई से पहले सही बीज दर और बीज उपचार से उत्पादन बढ़ता है।
धान की उन्नत किस्में बदल सकती हैं किसानों की किस्मत, बुवाई से पहले जानें कृषि वैज्ञानिक की राय
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की तैयारी के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली, रोग प्रतिरोधी और जलवायु अनुकूल धान की उन्नत किस्में अपनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही बीज चयन और वैज्ञानिक खेती से कम लागत में बेहतर पैदावार प...
महीन हो या मोटा धान, ये किस्में देंगी बंपर पैदावार; जानिए जून के पहले हफ्ते में नर्सरी डालने का फायदा
खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान के लिए जून के पहले हफ्ते में नर्सरी डालना सबसे उपयुक्त माना जाता है। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार मिट्टी और जलभराव के हिसाब से सही किस्म चुनकर किसान बेहतर उत्पादन ले सकते हैं।
धान की नर्सरी में पौधे पीले या बढ़वार रुकी? एक्सपर्ट का पक्का इलाज, मिलेगी बढ़िया पैदावार
धान की अच्छी पैदावार के लिए सही नर्सरी तैयार करना सबसे अहम है। जानिए वह वैज्ञानिक तरीका जिससे पौधों का पीलापन और रुकी हुई बढ़वार की समस्या दूर होगी और नर्सरी सिर्फ 21 दिनों में रोपाई के लिए तैयार हो जाएगी।
धान की नर्सरी में मेढ़ विधि अपनाएं और पाएं बंपर पैदावार, कृषि वैज्ञानिक डॉ. मौर्या ने बताए 3 खास सूत्र
भोजपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए. के. मौर्या ने धान सीजन में किसानों को पारंपरिक तरीका छोड़कर नर्सरी में मेढ़ विधि अपनाने, बीज उपचार करने और बेहतर पोषण प्रबंधन करने की सलाह दी है। इससे स्वस्थ बिचड़ा तैयार होगा और फसल की पैदावार बढ़ेगी।
धान किसानों के लिए राहत भरी खबर! कम बारिश में भी बरकरार रहेगी पैदावार, ये 5 बेहतरीन किस्में अपनाएं
बालाघाट जिले में 1.30 लाख से अधिक किसान परिवार धान की खेती से जुड़े हैं और जिले की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर धान उत्पादन पर टिकी है। कम बारिश की स्थिति में भी अच्छी उपज देने वाली किस्में किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं।
धान में हरियाली घट रही है तो यूरिया नहीं, माइक्रोन्यूट्रिएंट का करें छिड़काव, कीट भी रहेंगे दूर और फसल बनेगी मजबूत
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान में हरियाली बढ़ाने के लिए ज्यादा यूरिया डालने से फसल को नुकसान पहुंचता है। बेहतर परिणाम के लिए किसानों को सूक्ष्म तत्वों यानी माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव करना चाहिए।
धान में जोरदार फुटाव चाहिए? रोपाई के 15 दिन बाद करें यह आसान काम, जानें खास तरीका
बासमती धान की रोपाई कर चुके किसान अगर अच्छी पैदावार चाहते हैं तो 30 से 40 दिन के भीतर कुछ खास उपाय अपनाने होंगे। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार सही समय पर पटेला, संतुलित खाद और जरूरी पोषक तत्व देकर फुटाव को मजबूत बनाया जा सकता है।
धान की रोपाई से पहले अपनाएं कृषि विशेषज्ञ का यह आसान फॉर्मूला, बीमारियां रहेंगी दूर और उपज होगी दोगुनी
सहारनपुर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बताया कि स्वस्थ नर्सरी और पौध उखाड़ने के सही वैज्ञानिक तरीके को अपनाकर किसान तना छेदक, सुंडी और जड़ गलन जैसी बीमारियों से फसल को बचा सकते हैं और बंपर पैदावार ले सकते हैं।
उत्तर बिहार में मानसून पर ताजा जानकारी, मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए अहम सुझाव
पूसा के मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक समस्तीपुर और आसपास के जिलों में 15 से 20 जून के बीच मानसून दस्तक दे सकता है। वैज्ञानिकों ने किसानों को अभी से धान की खेती की तैयारी शुरू करने और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर नजर रखने की सलाह दी है।