40 नहीं पूरे 200 रुपये किलो! पलामू में इस खास चावल ने बदल दी किसानों की किस्मत भारत 2 घंटे पहले 3
झारखंड के पलामू जिले में किसान काला नमक किरण धान की खेती अपनाकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं, जिसका सुगंधित चावल बाजार में 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।

झारखंड के पलामू जिले में इन दिनों किसान धान की खेती में नई संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं। मौसम में लगातार आ रहे बदलाव और एल नीनो (El Niño) जैसे प्रभावों के चलते परंपरागत धान की खेती कई बार किसानों के लिए मुश्किल साबित होती है। कम बारिश, बढ़ता तापमान और उत्पादन लागत में इजाफा किसानों के मुनाफे पर सीधा असर डालता है। ऐसे हालात में किसान अब उन किस्मों की ओर बढ़ रहे हैं, जो कम लागत में ज्यादा आमदनी दे सकें। इसी सिलसिले में काला नमक किरण धान किसानों के बीच तेजी से अपनी जगह बना रहा है।

गोरखपुर से मंगाया जाता है फाउंडेशन बीज

पलामू के किसान ओंकार नाथ बीते कुछ वर्षों से काला नमक किरण धान की खेती कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह धान मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर इलाके की पारंपरिक और प्रसिद्ध किस्म है, जिसे कृषि वैज्ञानिकों ने संरक्षित कर विकसित किया है। इसका फाउंडेशन बीज गोरखपुर से मंगाया जाता है।

उनके अनुसार यह धान कम बढ़वार वाला होता है, जिसके कारण फसल गिरने की आशंका कम रहती है और इसका प्रबंधन भी आसान हो जाता है। इसकी खेती में लागत लगभग सामान्य धान के बराबर ही आती है, लेकिन बाजार में मिलने वाला दाम किसानों को कहीं अधिक फायदा पहुंचाता है।

किसानों के लिए ज्यादा फायदे का सौदा

ओंकार नाथ ने बताया कि काला नमक किरण धान की सबसे बड़ी खूबी इसकी गुणवत्ता और बाजार में इसकी मांग है। इसका चावल सुगंधित होने के साथ-साथ विशेष गुणों से भरपूर माना जाता है। बाजार में इसका चावल 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक बिकता है, जबकि सामान्य धान का चावल आमतौर पर 40 से 50 रुपये प्रति किलो के आसपास बिकता है। यही वजह है कि यह किस्म किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो रही है।

उन्होंने बताया कि फिलहाल किसानों को इसका बीज लगभग 100 रुपये प्रति किलो की दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उनकी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा किसान इस विशेष प्रभेद की खेती करें और अपनी आमदनी बढ़ाएं।

कम जमीन में ज्यादा कमाई

ओंकार नाथ का मानना है कि अगर किसान परंपरागत धान के साथ-साथ इस तरह की उच्च मूल्य वाली किस्मों को अपनाएं, तो कम क्षेत्रफल में भी अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। कृषि विशेषज्ञ भी मानते हैं कि बदलते मौसम और बाजार की मांग को देखते हुए ऐसी खास धान किस्में किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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