धान की खेती हुई आसान: सीधी बुवाई करने वाली ये दो मशीनें घटाएंगी मजदूरी और बढ़ाएंगी मुनाफा मध्य प्रदेश 2 घंटे पहले 3
अब धान की खेती में नर्सरी, रोपाई और भारी मजदूरी की जरूरत घट रही है। सुपर सीडर और जीरो टिलेज सीड ड्रिल एक ही बार में बुवाई पूरी कर पानी, डीजल, समय और श्रम की बचत करा रही हैं।

धान उत्पादन की वह तस्वीर अब तेजी से बदल रही है, जिसमें किसानों को नर्सरी तैयार करने से लेकर रोपाई तक हर कदम पर भारी मजदूरी और लंबे इंतजार पर निर्भर रहना पड़ता था। आधुनिक कृषि यंत्रों और नई तकनीकों ने धान की खेती को आसान, किफायती और ज्यादा फायदेमंद बना दिया है।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर किसान इन नई तकनीकों को अपनाएं तो उत्पादन लागत घटने के साथ-साथ पानी, समय और श्रम की भी बड़ी बचत होगी। खास बात यह है कि फसल जल्दी तैयार होने से एक ही खेत से साल भर में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है।

परंपरागत खेती में लगता था ज्यादा समय

संभागीय कृषि यंत्री एस.के. नारनवरे ने बताया कि पहले धान की पूरी खेती नर्सरी पर ही टिकी रहती थी। जून के महीने में खेत के करीब दसवें हिस्से में नर्सरी तैयार की जाती थी। इसके बाद खेत में पानी भरकर कीचड़ बनाया जाता और उपचारित बीजों की बुवाई की जाती थी।

इस दौरान पौध तैयार होने में लगभग 25 से 30 दिन लग जाते थे। साथ ही मुख्य खेत को कई बार जुताई और पाटा लगाकर रोपाई के लायक बनाया जाता था। पौध तैयार होने पर मजदूरों की मदद से उन्हें उखाड़कर मुख्य खेत में रोपा जाता था। इस पूरी प्रक्रिया में काफी समय, श्रम और पानी खर्च होता था, लेकिन अब आधुनिक तकनीक ने इस ढर्रे को काफी हद तक बदल दिया है।

डायरेक्ट सीडेड राइस तकनीक से घटा खर्च

आजकल किसानों के बीच डायरेक्ट सीडेड राइस तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस तरीके में न तो धान की नर्सरी तैयार करनी पड़ती है और न ही बाद में रोपाई की जरूरत होती है। बीजों को सीधे खेत में बो दिया जाता है, जिससे मजदूरी पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है।

कृषि विभाग के अनुसार, पारंपरिक रोपाई की तुलना में इस तकनीक से 15 से 20 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। शुरुआती दौर में खेत को लगातार पानी से भरे रखने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे सिंचाई का खर्च भी घटता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि फसल का जीवन चक्र 7 से 10 दिन तक घट जाता है, यानी खेत जल्दी खाली हो जाता है और किसान समय पर गेहूं, चना या अन्य रबी फसलों की बुवाई कर सालाना आय बढ़ा सकते हैं।

सुपर सीडर: एक ही पास में पूरा काम

धान की सीधी बुवाई के लिए सुपर सीडर बेहद उपयोगी मशीन मानी जा रही है। यह एक कंबाइंड एग्रीकल्चर मशीनरी है, जिसमें रोटावेटर और सीड ड्रिल दोनों की सुविधा एक साथ मिलती है। यह मशीन खेत में मौजूद पिछली फसल के अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में मिला देती है और उसी समय बीज तथा खाद की बुवाई भी कर देती है।

इस तरह खेत की तैयारी और बुवाई दोनों काम एक ही बार में पूरे हो जाते हैं, जिससे किसानों का डीजल, मेहनत और समय काफी बचता है। साथ ही फसल अवशेषों को जलाने की जरूरत नहीं रहती, जो पर्यावरण संरक्षण में भी मददगार है।

जीरो टिलेज सीड ड्रिल: बिना जुताई की खेती

जीरो टिलेज सीड ड्रिल उन किसानों के लिए बेहतर विकल्प है जो बिना जुताई किए सीधे बुवाई करना चाहते हैं। यह मशीन कड़े या सूखे खेत में भी आसानी से काम कर लेती है। इसके विशेष नुकीले फावड़े मिट्टी में सिर्फ एक पतली लाइन बनाते हैं, जहां बीज और खाद तय गहराई पर गिरते जाते हैं। इसके बाद पीछे लगा रोलर मिट्टी को दबाकर बीजों को सुरक्षित कर देता है।

इस तकनीक से खेत की बार-बार जुताई की जरूरत खत्म हो जाती है। नतीजतन डीजल का खर्च घटता है और मिट्टी की नमी भी लंबे समय तक बनी रहती है।

मशीनों का इस्तेमाल कैसे करें

विशेषज्ञों के मुताबिक बुवाई से पहले बीजों को फफूंदनाशक दवा से उपचारित करना जरूरी है। इसके बाद खेत में पर्याप्त नमी होने पर मशीन के बीज और खाद वाले बॉक्स भर दिए जाते हैं।

  • बुवाई की गहराई 2 से 3 सेंटीमीटर रखी जाती है।
  • कतारों के बीच की दूरी लगभग 20 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
  • ट्रैक्टर को 3 से 5 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलाकर एक ही बार में बुवाई पूरी की जा सकती है।

इस प्रक्रिया से पानी, ईंधन और मेहनत में करीब 20 प्रतिशत तक बचत संभव है।

सरकार दे रही भारी सब्सिडी

मध्य प्रदेश सरकार किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। सुपर सीडर और जीरो टिलेज सीड ड्रिल पर 40 से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। सुपर सीडर पर किसानों को अधिकतम 1.05 लाख से 1.20 लाख रुपये तक की सब्सिडी मिल सकती है।

अनुदान पाने के लिए किसानों को एमपी डीबीटी कृषि यंत्र पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है। आवेदन के दौरान आधार कार्ड, भूमि दस्तावेज, बैंक पासबुक और ट्रैक्टर की आरसी जैसी जानकारी जमा करनी पड़ती है। चयन लॉटरी प्रणाली के जरिए होता है और परमिट मिलने के बाद किसान अधिकृत डीलर से मशीन खरीद सकते हैं। सत्यापन के बाद सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में भेज दी जाती है।

कम लागत में ज्यादा कमाई का मौका

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में धान की खेती में डायरेक्ट सीडिंग तकनीक और आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा। पानी की बचत, कम लागत, कम मजदूरी और समय पर अगली फसल लगाने की सुविधा किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है। ऐसे में सुपर सीडर और जीरो टिलेज सीड ड्रिल जैसी मशीनें धान की खेती में गेम चेंजर साबित हो सकती हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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