उत्तर प्रदेश
6 घंटे पहले
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सहारनपुर जनपद में किसान बासमती धान के साथ-साथ धान की कई अन्य किस्में लगाना पसंद करते हैं। धान के पौधों में हरियाली बनी रहना बेहद जरूरी माना जाता है, क्योंकि हरे-भरे खेत से ही यह अंदाजा लगता है कि फसल कितनी तेजी से बढ़ेगी, उसे सही पोषण मिल रहा है या नहीं और उसमें बीमारियों का स्तर कम है। लेकिन कई बार किसानों की लापरवाही और दूसरे पोषक तत्वों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण धान की हरियाली घट जाती है, जिससे पौधे की बढ़वार भी रुक जाती है।
हरियाली बढ़ाने के लिए अक्सर किसान यूरिया का अधिक प्रयोग करते हैं। इससे हरापन तो बढ़ जाता है, मगर साथ ही फसल में कई तरह की समस्याएं भी पैदा हो जाती हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ यूरिया के बजाय कुछ दूसरे पोषक तत्वों के इस्तेमाल की सलाह देते हैं।
यूरिया के अधिक प्रयोग से बढ़ता है नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉक्टर आईके कुशवाहा बताते हैं कि अधिकतर किसान धान में हरियाली लाने के लिए यूरिया का इस्तेमाल करते हैं। उनकी सोच होती है कि जितना ज्यादा यूरिया डालेंगे, हरियाली उतनी ही अच्छी आएगी। लेकिन किसानों को ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।
माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव बेहतर विकल्प
डॉक्टर कुशवाहा के अनुसार जब भी किसानों को लगे कि धान का पौधा कमजोर है और हरियाली कम आ रही है, तो उन्हें बाजार में उपलब्ध माइक्रोन्यूट्रिएंट का सहारा लेना चाहिए, जिन्हें सूक्ष्म तत्व भी कहा जाता है। इनमें पौधे के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद रहते हैं।
उनका कहना है कि अगर किसान भाई अपने खेत में सूक्ष्म तत्वों का छिड़काव के रूप में प्रयोग करते हैं तो निश्चित रूप से पौधा मजबूत होता है, खर्च कम आता है और हरियाली बढ़ने के साथ-साथ अच्छा उत्पादन भी मिलता है।
छिड़काव से नहीं दिखेंगे कीट
विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर छिड़काव के दौरान किसानों को खेत में कोई कीट या बीमारी नजर आती है, तो वे उसी छिड़काव के साथ उन्हें नियंत्रित करने के लिए कृषि रक्षक रसायनों का भी प्रयोग कर सकते हैं।
उन्होंने समझाया कि हरियाली का असली मतलब फोटोसिंथेसिस है। पौधे को भोजन सूरज की रोशनी और पानी के जरिए मिलता है। अगर किसान अपने खेत से गहरे हरे रंग की फसल और बेहतर उत्पादन चाहते हैं, तो धान की बाली बूट में आने से पहले संतुलित उर्वरकों का इस्तेमाल कर अपने पौधे को मजबूत बना लें।
संतुलित उर्वरक ही फसल की ताकत
डॉक्टर कुशवाहा ने चेताया कि यूरिया यानी नाइट्रोजन के अधिक इस्तेमाल से खेत में पौधे की बढ़वार तो बढ़ जाती है, लेकिन बाली कमजोर हो जाती है और ऐसे खेतों में कीट तथा रोगों का प्रकोप ज्यादा रहता है। इसलिए उनकी किसानों से अपील है कि वे यूरिया के अधिक प्रयोग से बचें और पोषक तत्वों तथा माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव के रूप में अधिक से अधिक इस्तेमाल करें।
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