उपनाम: धान की खेती
धान की नर्सरी में मेढ़ विधि अपनाएं और पाएं बंपर पैदावार, कृषि वैज्ञानिक डॉ. मौर्या ने बताए 3 खास सूत्र
भोजपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए. के. मौर्या ने धान सीजन में किसानों को पारंपरिक तरीका छोड़कर नर्सरी में मेढ़ विधि अपनाने, बीज उपचार करने और बेहतर पोषण प्रबंधन करने की सलाह दी है। इससे स्वस्थ बिचड़ा तैयार होगा और फसल की पैदावार बढ़ेगी।
धान किसानों के लिए राहत भरी खबर! कम बारिश में भी बरकरार रहेगी पैदावार, ये 5 बेहतरीन किस्में अपनाएं
बालाघाट जिले में 1.30 लाख से अधिक किसान परिवार धान की खेती से जुड़े हैं और जिले की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर धान उत्पादन पर टिकी है। कम बारिश की स्थिति में भी अच्छी उपज देने वाली किस्में किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं।
धान में हरियाली घट रही है तो यूरिया नहीं, माइक्रोन्यूट्रिएंट का करें छिड़काव, कीट भी रहेंगे दूर और फसल बनेगी मजबूत
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार धान में हरियाली बढ़ाने के लिए ज्यादा यूरिया डालने से फसल को नुकसान पहुंचता है। बेहतर परिणाम के लिए किसानों को सूक्ष्म तत्वों यानी माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव करना चाहिए।
धान में जोरदार फुटाव चाहिए? रोपाई के 15 दिन बाद करें यह आसान काम, जानें खास तरीका
बासमती धान की रोपाई कर चुके किसान अगर अच्छी पैदावार चाहते हैं तो 30 से 40 दिन के भीतर कुछ खास उपाय अपनाने होंगे। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार सही समय पर पटेला, संतुलित खाद और जरूरी पोषक तत्व देकर फुटाव को मजबूत बनाया जा सकता है।
धान की रोपाई से पहले अपनाएं कृषि विशेषज्ञ का यह आसान फॉर्मूला, बीमारियां रहेंगी दूर और उपज होगी दोगुनी
सहारनपुर कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डॉ. आई.के. कुशवाहा ने बताया कि स्वस्थ नर्सरी और पौध उखाड़ने के सही वैज्ञानिक तरीके को अपनाकर किसान तना छेदक, सुंडी और जड़ गलन जैसी बीमारियों से फसल को बचा सकते हैं और बंपर पैदावार ले सकते हैं।
उत्तर बिहार में मानसून पर ताजा जानकारी, मौसम वैज्ञानिकों ने किसानों को दिए अहम सुझाव
पूसा के मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक समस्तीपुर और आसपास के जिलों में 15 से 20 जून के बीच मानसून दस्तक दे सकता है। वैज्ञानिकों ने किसानों को अभी से धान की खेती की तैयारी शुरू करने और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों पर नजर रखने की सलाह दी है।
धान की रोपाई से पहले करें यह जरूरी काम, खरपतवार की समस्या होगी 80% तक कम
बारिश का मौसम आते ही किसान धान की रोपाई की तैयारी में लग जाते हैं। रोपाई से 20-25 दिन पहले हल्की सिंचाई और कीचड़ वाली जुताई करने से खरपतवार की समस्या लगभग 80 प्रतिशत तक घटाई जा सकती है।
धान की खेती की तैयारी: रोपाई से पहले खेत कैसे करें तैयार, जानिए विशेषज्ञ की सलाह से मुनाफे का रास्ता
खरीफ सीजन से पहले धान की बेहतर पैदावार पाने के लिए कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को खेत की जुताई, हरी खाद और रोपा पद्धति अपनाने की सलाह दी है। समय रहती नर्सरी तैयार करने और जैविक उपायों से लागत घटने के साथ मिट्टी की ताकत भी बढ़ती है।
धान से चाहिए बंपर पैदावार? अपनाएं DSR तकनीक, कम लागत और कम पानी में मिलेगा तगड़ा मुनाफा
धान की पारंपरिक रोपाई के बजाय सीधी बुवाई यानी DSR तकनीक अपनाकर किसान कम पानी और कम लागत में अच्छी पैदावार ले सकते हैं, साथ ही गिरते भूजल स्तर को बचाने में भी मदद मिलती है।
कम बारिश वाले इलाकों में अपनाएं धान की सीधी बुवाई, बचेगा पैसा, समय और मेहनत
धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) विधि कम बारिश वाले इलाकों के किसानों के लिए फायदेमंद मानी जा रही है, इसमें पारंपरिक रोपनी की तुलना में लागत 40 फीसदी कम आती है और 30% तक पानी की बचत होती है।
धान की बुवाई से पहले खेतों की जुताई क्यों है बेहद जरूरी? जान लें ये अहम बात
नौतपा की तेज गर्मी खरीफ फसल की तैयारी के लिए सही समय है। इस दौरान खेतों की जुताई करने से खरपतवार और कीट नष्ट हो जाते हैं, जिससे आगे फसल को नुकसान कम होता है।
खैरा रोग से आधी हो सकती है धान की उपज, बुवाई से पहले अपनाएं जिंक सल्फेट वाला यह वैज्ञानिक उपाय
धान में जिंक की कमी से होने वाला खैरा रोग पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाता है। रोपाई से पहले आखिरी जुताई के समय जिंक सल्फेट डालकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।