धान किसानों के लिए राहत भरी खबर! कम बारिश में भी बरकरार रहेगी पैदावार, ये 5 बेहतरीन किस्में अपनाएं भारत एक घंटा पहले 3
बालाघाट जिले में 1.30 लाख से अधिक किसान परिवार धान की खेती से जुड़े हैं और जिले की अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर धान उत्पादन पर टिकी है। कम बारिश की स्थिति में भी अच्छी उपज देने वाली किस्में किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं।

धान का कटोरा कहलाता है बालाघाट

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले को धान का कटोरा कहा जाता है। इस पहचान के पीछे यहां की खेती और किसानों की मेहनत का बड़ा योगदान है। जिले के 1.30 लाख से अधिक किसान परिवार सीधे तौर पर धान की खेती से जुड़े हुए हैं, जिनकी आजीविका इसी फसल पर निर्भर करती है।

कितने रकबे में होती है खेती

जिले में कुल 3 लाख 26 हजार 690 हेक्टेयर कृषि भूमि उपलब्ध है। इसमें से खरीफ सीजन के दौरान करीब 1 लाख 76 हजार 918 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की जाती है। इसके अलावा रबी सीजन में भी लगभग 37 हजार हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल ली जाती है।

अर्थव्यवस्था का बड़ा आधार है धान

यही कारण है कि बालाघाट जिले की अर्थव्यवस्था काफी हद तक धान के उत्पादन पर टिकी हुई है। फसल का उत्पादन जितना बेहतर होगा, किसानों की आमदनी और जिले की आर्थिक स्थिति उतनी ही मजबूत बनी रहेगी। ऐसे में कम बारिश की परिस्थिति में भी अच्छी पैदावार देने वाली किस्मों का चयन किसानों के लिए बेहद फायदेमंद माना जा रहा है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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