धान की नर्सरी में पौधे पीले या बढ़वार रुकी? एक्सपर्ट का पक्का इलाज, मिलेगी बढ़िया पैदावार उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 18
धान की अच्छी पैदावार के लिए सही नर्सरी तैयार करना सबसे अहम है। जानिए वह वैज्ञानिक तरीका जिससे पौधों का पीलापन और रुकी हुई बढ़वार की समस्या दूर होगी और नर्सरी सिर्फ 21 दिनों में रोपाई के लिए तैयार हो जाएगी।

धान से शानदार पैदावार लेने की पहली और सबसे जरूरी शर्त है उसकी नर्सरी को सही ढंग से तैयार करना। अक्सर किसानों की एक छोटी सी चूक ही पूरी नर्सरी पर भारी पड़ जाती है, जिससे पौधे पीले पड़ने लगते हैं या उनकी बढ़वार बीच में ही रुक जाती है। सही जानकारी और वैज्ञानिक तरीका अपनाकर इस समस्या को आसानी से रोका जा सकता है।

आखिर क्यों पीले पड़ते हैं नर्सरी के पौधे

बलिया के कृषि विशेषज्ञ प्रोफेसर अशोक कुमार सिंह के अनुसार, खेत में गेहूं का भूसा या आधी सड़ी गोबर की खाद छोड़ देना इस परेशानी की सबसे बड़ी जड़ है। जब मिट्टी में मौजूद सूक्ष्म जीव इस बचे हुए कचरे को सड़ाने में जुटते हैं, तो वे जमीन से सारा पोषण खुद सोख लेते हैं।

नतीजा यह होता है कि पौधों तक जरूरी पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते और वे कमजोर रह जाते हैं। यही वजह है कि नर्सरी के पौधे पीले दिखने लगते हैं और उनकी बढ़वार थम जाती है।

समस्या से निपटने का असरदार उपाय

एक्सपर्ट बताते हैं कि इस दिक्कत का वैज्ञानिक समाधान मौजूद है। सही तरीका अपनाने पर मिट्टी के सूक्ष्म जीवों और पौधों के बीच पोषण को लेकर होने वाली खींचतान खत्म हो जाती है और पौधों को पर्याप्त खुराक मिलती रहती है।

21 दिन में तैयार होगी तंदुरुस्त नर्सरी

इस वैज्ञानिक विधि को अपनाने से धान की नर्सरी मात्र 21 दिनों में रोपाई के लिए पूरी तरह तंदुरुस्त और तैयार हो जाती है। स्वस्थ और मजबूत पौधे रोपाई के बाद बेहतर तरीके से जमते हैं, जिससे आगे चलकर अच्छी और भरपूर पैदावार मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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