धान की उन्नत किस्में बदल सकती हैं किसानों की किस्मत, बुवाई से पहले जानें कृषि वैज्ञानिक की राय छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 3
छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की तैयारी के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को अधिक उत्पादन देने वाली, रोग प्रतिरोधी और जलवायु अनुकूल धान की उन्नत किस्में अपनाने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सही बीज चयन और वैज्ञानिक खेती से कम लागत में बेहतर पैदावार पाई जा सकती है।

छत्तीसगढ़ में खरीफ सीजन की तैयारियां जोर पकड़ चुकी हैं और किसान धान की बुवाई तथा रोपाई के लिए अपने खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं। ऐसे समय में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर और ठाकुर बैरिस्टर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय बिलासपुर के कृषि वैज्ञानिक किसानों को ज्यादा पैदावार देने वाली, रोग से लड़ने में सक्षम और मौसम के अनुकूल धान की उन्नत किस्में अपनाने की सलाह दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि उचित बीज का चुनाव और वैज्ञानिक ढंग से की गई खेती किसानों को कम खर्च में बेहतर उपज दिलाकर उनकी आमदनी बढ़ा सकती है।

छत्तीसगढ़ को पूरे देश में ‘धान का कटोरा’ कहा जाता है। राज्य की बड़ी आबादी का जीवन कृषि पर टिका हुआ है और धान यहां की मुख्य फसल है। अनुकूल जलवायु और उपजाऊ भूमि की वजह से हर वर्ष लाखों किसान धान की पैदावार करते हैं। ऐसी स्थिति में नई तकनीकें और उन्नत किस्में किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।

उन्नत किस्में अपनाने पर जोर

ठाकुर बैरिस्टर छेदीलाल कृषि महाविद्यालय बिलासपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिनेश पांडे के मुताबिक, किसानों को धान की ऐसी किस्मों को चुनना चाहिए जो अधिक उपज देने के साथ-साथ रोगों और बदलते मौसम का सामना करने में सक्षम हों। इससे फसल पर पड़ने वाला जोखिम घटता है और किसानों की आमदनी में बढ़ोतरी होती है।

ज्यादा उपज देने वाली प्रमुख किस्में

विशेषज्ञों ने किसानों को राजेश्वरी (IGKV R-1), महामाया (IGKV R-2), छत्तीसगढ़ सादा (IGKV R-3) और राजेश्री (IGKV R-4) जैसी उन्नत किस्में अपनाने की सलाह दी है। ये किस्में बेहतर उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और गुणवत्तापूर्ण चावल के लिए पहचानी जाती हैं। इनके अलावा IGKV भाटापारा-1 और भाटापारा-2 को भी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प माना जा रहा है।

हाइब्रिड धान से बंपर पैदावार

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अराइज 6444 गोल्ड, US-362, एडवांटा-837 और सिजेंटा-7001 जैसी संकर (हाइब्रिड) किस्में अधिक उत्पादन देने के लिए मशहूर हैं। ये किस्में कम समय में अच्छी पैदावार देती हैं और बदलते मौसम की परिस्थितियों को भी बेहतर तरीके से सहन कर लेती हैं।

कम अवधि में तैयार होने वाली किस्में

MTU-1010, स्वर्ण (मसूरा), IR-64 और TCSM जैसी किस्में किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। ये किस्में कम समय में पककर तैयार हो जाती हैं और अच्छी उपज देने के कारण किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाती हैं।

सुगंधित धान से बढ़ेगी कमाई

बिलासपुर और इसके आसपास के इलाकों में दुबराज, विष्णुभोग, जीराफूल, बादशाह भोग और लुचई जैसी सुगंधित धान की किस्मों की खास मांग बनी रहती है। इन किस्मों को सामान्य धान की तुलना में अधिक बाजार मूल्य मिलता है, जिससे किसानों को अतिरिक्त मुनाफा हासिल हो सकता है।

रोपाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान

डॉ. दिनेश पांडे ने किसानों को सलाह दी है कि वे प्रमाणित बीजों का चयन करें, समय रहते खेत की तैयारी पूरी करें और कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह के अनुसार ही रोपाई करें। सही किस्म और वैज्ञानिक तकनीक अपनाकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसल की लागत पर भी नियंत्रण रख सकते हैं।

खेती को बनाएं वैज्ञानिक और लाभकारी

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि उन्नत बीज, वैज्ञानिक खेती और समय पर कृषि सलाह का पालन करने से किसान जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच भी बेहतर उपज प्राप्त कर सकते हैं। सही धान किस्म का चयन ही खरीफ सीजन में अधिक मुनाफे की पहली सीढ़ी साबित हो सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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