महीन हो या मोटा धान, ये किस्में देंगी बंपर पैदावार; जानिए जून के पहले हफ्ते में नर्सरी डालने का फायदा उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 17
खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान के लिए जून के पहले हफ्ते में नर्सरी डालना सबसे उपयुक्त माना जाता है। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार मिट्टी और जलभराव के हिसाब से सही किस्म चुनकर किसान बेहतर उत्पादन ले सकते हैं।

खरीफ सीजन की सबसे अहम फसल धान की बुआई की तैयारियां किसानों ने शुरू कर दी हैं। चाहे महीन धान हो या मोटा, नर्सरी डालने के लिहाज से यह समय सबसे बेहतर बताया जा रहा है। माना जाता है कि समय पर नर्सरी डालने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और मानसून आते ही खेतों में रोपाई का काम शुरू किया जा सकता है।

मोटे धान के लिए कौन-सी किस्में चुनें

शाहजहांपुर के कृषि विशेषज्ञ डॉ. एनपी गुप्ता के मुताबिक, मोटे धान की खेती करने वाले किसान पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय की उन्नत किस्मों को प्राथमिकता दे सकते हैं। इनमें पंत धान-4, पंत धान-10 और पंत धान-12 शामिल हैं, जो अच्छे नतीजे देती हैं।

मिट्टी और जलभराव के अनुसार करें बीज का चयन

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बीज का चुनाव हमेशा खेत की मिट्टी के प्रकार और जलभराव की स्थिति को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए। हर इलाके की परिस्थिति अलग होती है, इसलिए उसी हिसाब से सही किस्म का चयन फायदेमंद रहता है।

कम संसाधनों में बेहतर उपज देने वाली किस्में

जिन किसानों के पास सीमित संसाधन हैं, उनके लिए भी कुछ खास किस्में मौजूद हैं। पीआर-113, पीआर-126 और पीआर-131 ऐसी किस्में हैं, जो कम लागत और कम संसाधनों में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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