उपनाम: सक्सेस स्टोरी
गोबर की खाद से जैविक सब्जियों की खेती, किचन गार्डन से हर महीने अच्छी आमदनी—जानिए विमला की मिसाल
गोंडा की गृहिणी विमला मौर्य ने घर की खाली जमीन को जैविक किचन गार्डन में बदलकर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी। इसी से होने वाली कमाई से वे घर का खर्च और बीमार पति का इलाज दोनों संभाल रही हैं।
हैदराबाद की नौकरी छोड़ गांव लौटे शिवम, डेयरी से सालाना लाखों की कमाई
सीधी जिले के गोपालपुर निवासी शिवम शुक्ला ने हैदराबाद की अकाउंटेंट की नौकरी छोड़कर अपने गांव में डेयरी व्यवसाय शुरू किया और आज इसी से सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं।
नौकरी छोड़ गांव लौटा युवा, ‘उपसरपंच चाय’ से बनाई अलग पहचान, बन गया मिसाल
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के एक युवक ने कतर की नौकरी छोड़कर मुंबई में मिले आइडिया से प्रेरित होकर अपने गांव में ‘उपसरपंच चाय’ नाम से स्टार्टअप शुरू किया और आज रोजाना सैकड़ों कप चाय बेचकर खुशहाल जीवन जी रहा है।
नौकरी छोड़कर शुरू किया कारोबार, झेलीं तमाम मुश्किलें, फिर भी डटे रहे ग्रेटर नोएडा के अमित उपाध्याय
ग्रेटर नोएडा के उद्यमी अमित उपाध्याय ने नौकरी छोड़कर कारोबार की राह चुनी और कैंसिल ऑर्डर, कर्ज व आर्थिक संकट से जूझते हुए आज सालाना 5 से 7 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गए हैं।
घर की कला बनी वैश्विक पहचान, सऊदी अरब से लंदन तक गूंज रहा इस परिवार के हुनर का नाम
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ₹500000 का लोन लेकर शुरू किए गए बुटीक की कारीगरी आज सऊदी अरब, अमेरिका और लंदन तक पसंद की जा रही है, जिससे हर साल तीन से चार लाख रुपए की कमाई हो रही है।
सक्सेस स्टोरी: लंदन की CA कनिका और नेवी कैप्टन राहुल की प्रेम कहानी, नौकरी छोड़ रांची में खड़ा किया रेस्टोरेंट ब्रांड
रांची के राहुल और कनिका ने एजुकेशन लोन चुकाने के बाद नेवी की नौकरी छोड़कर मल्हारी रेस्टोरेंट ब्रांड खड़ा किया, जिसकी दो ब्रांच और एक बैंकट हॉल हैं और अब वे एक और होटल खोलने की तैयारी में हैं।
गाय के दूध से मां को मिली राहत, असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी छोड़ शुरू किया गौ सेवा धाम, आज बनीं मिसाल
एमसीए की पढ़ाई के बाद चार साल असिस्टेंट प्रोफेसर रहीं कल्पना कुमावत ने स्थायी नौकरी छोड़कर महज पांच गिर गायों से अपना सफर शुरू किया, जो आज 60 से अधिक गायों तक पहुंच चुका है। ऑर्गेनिक डेयरी मॉडल के जरिए वे जयपुर में रोजाना 100 लीटर से ज्यादा शुद्ध दूध पहुं...
एयर होस्टेस से 'बांसा घर' की मालकिन तक: पिंकी ने कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ मोमोज से कमाए महीने के 50 हजार
झारखंड के बोकारो जिले की पिंकी कुमारी ने गुड़गांव की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर अपने गांव में फास्ट फूड स्टॉल शुरू किया और आज शाकाहारी मोमोज बेचकर हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक कमा रही हैं।
सक्सेस स्टोरी: न नौकरी न दफ्तर, घर बैठे महीने में 2 लाख की कमाई; खुशबू ने 100 महिलाओं की बदली तकदीर
बिहार के मधुबनी की खुशबू चौधरी मिथिला पेंटिंग के दम पर घर से ही हर महीने 2 लाख रुपये तक कमाती हैं और अब तक 100 से ज्यादा महिलाओं व लड़कियों को मुफ्त प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना चुकी हैं।
लुधियाना में मजदूरी से बिहार में अपनी कंपनी तक: 12वीं पास शंभू ने 50 हजार से शुरू कर 30 लाख का टर्नओवर खड़ा किया
जहानाबाद के शंभू कुमार ने 12वीं के बाद नौकरी छोड़कर सिर्फ 50 हजार रुपये से कपड़ा उद्योग शुरू किया और आज उनका सालाना टर्नओवर 30 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। PMEGP स्कीम की मदद से उनका कारोबार अब 7 जिलों में फैला है और दर्जनों लोगों को रोजगार दे रहा है।
सक्सेस स्टोरी: फौज से रिटायर होकर असली फल-सब्जियों जैसी मोमबत्तियां गढ़ रहे बागेश्वर के नारायण दत्त, कमाई सुनकर चौंक जाएंगे
बागेश्वर के नैनी गांव के पूर्व सैनिक नारायण दत्त फल और सब्जियों की हूबहू नकल जैसी सजावटी मोमबत्तियां बनाकर त्योहारी सीजन में हर महीने 2 से 3 लाख रुपये कमा रहे हैं और गांव की महिलाओं को रोजगार भी दे रहे हैं।
सफलता की कहानी: ज़मीन से 400 मीटर नीचे खदानों में जुटीं प्रिया दीक्षित, महिलाओं की प्रेरणा बनीं
खेतड़ी के हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड कॉपर कॉम्प्लेक्स में असिस्टेंट मैनेजर (एक्सप्लोरेशन) के पद पर कार्यरत प्रिया दीक्षित ज़मीन से करीब 400 मीटर नीचे खदानों में खनिजों की जांच कर रही हैं। पुरुष-प्रधान माने जाने वाले माइनिंग सेक्टर में उन्होंने अपनी मेहनत से...
तीन पीढ़ियों की मेहनत: छोटे दूध भंडार से 'दिव्य दूध' तक, कैसे बना खंडवा का यह ब्रांड एमपी की पहचान
खंडवा में 1980 में महज एक छोटी दूध दुकान से शुरू हुआ सफर आज 'दिव्य दूध' के रूप में मध्य प्रदेश के भरोसेमंद डेयरी ब्रांड में बदल चुका है। तीन पीढ़ियों की मेहनत, गुणवत्ता और पारिवारिक एकजुटता की यह कहानी हर युवा उद्यमी के लिए प्रेरणा है।
सक्सेस स्टोरी: बचपन में मां से किया था फौजी बनने का वादा, आज पीएम मोदी की सुरक्षा संभाल रहे दूदू के बालकिशन बलाई
राजस्थान के दूदू जिले के एक छोटे से गांव के बालकिशन बलाई आज एसपीजी कमांडो के रूप में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में तैनात हैं। देश सेवा में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा सम्मानित किया गया है।
अखबार बांटने से लेकर अपने ब्रांड तक: जमशेदपुर के मनप्रीत की प्रेरक यात्रा
तीन साल की उम्र में पिता को खोने वाले जमशेदपुर के 21 वर्षीय मनप्रीत सिंह ने बचपन से मेहनत कर आज 'Shades of Punjab' नाम से अपना कपड़ा ब्रांड खड़ा किया है, जिसके शहर में दो आउटलेट चल रहे हैं।