सक्सेस स्टोरी: मधुमक्खी पालन से सालाना ₹500000 की कमाई, किसान राजकिशोर ने यूं बदली अपनी तकदीर व्यापार एक महीने पहले 22
छपरा के किसान राजकिशोर पटेल ने 1990 में महज 10 पेटी से मधुमक्खी पालन शुरू किया और आज 300 से अधिक पेटी के साथ हर साल घर बैठे 5 लाख रुपये कमा रहे हैं।

बिहार के छपरा जिले के किसान अब परंपरागत खेती-किसानी के साथ-साथ मधुमक्खी पालन को आमदनी का बड़ा जरिया बना रहे हैं। जिले में दो दर्जन से अधिक किसान इस काम से अच्छी कमाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को सरकार की ओर से सब्सिडी भी मुहैया कराई जाती है। इन्हीं में एक नाम राजकिशोर पटेल का है, जिन्होंने सिर्फ 10 पेटी से अपनी शुरुआत की थी और आज उनके पास 300 से अधिक पेटियां हैं। इन पेटियों से वे साल भर का खर्च निकालने के बाद 5 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर लेते हैं।

राजकिशोर पटेल मूल रूप से चंपारण जिले के रहने वाले हैं, लेकिन वे छपरा आकर मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं। जिले के मांझी प्रखंड स्थित मेहंदी गंज गांव में वे 300 पेटियों के साथ मोटी कमाई कर रहे हैं।

कैसे आया मधुमक्खी पालन का विचार

राजकिशोर पटेल बताते हैं कि पहले वे सिर्फ खेती करते थे। इसी दौरान कृषि वैज्ञानिकों के संपर्क में आने के बाद उन्होंने समस्तीपुर की पूसा यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षण लिया। इसके बाद उन्होंने मधुमक्खी पालन की शुरुआत की। शुरुआती दौर में सरकार की ओर से उन्हें मुफ्त में 10 पेटियां दी गई थीं। उन्हीं 10 पेटियों को बढ़ाकर उन्होंने 300 से अधिक कर लिया, जिससे हर साल खर्च काटकर 5 लाख रुपये से ज्यादा की आमदनी हो जाती है।

1990 से जुड़े हैं इस काम से

राजकिशोर पटेल साल 1990 से मधुमक्खी पालन कर रहे हैं, यानी जब से देश में इटालियन मेलीफेरा मधुमक्खी लाई गई, तभी से वे इस काम में जुटे हुए हैं। अब तक वे छपरा और चंपारण समेत कई जिलों के सैकड़ों किसानों को निशुल्क प्रशिक्षण देकर मधुमक्खी पालक बना चुके हैं। उनसे प्रशिक्षण लेकर कई किसान आज मधुमक्खी पालन कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि इस मधुमक्खी को किसी भी बगीचे या तालाब के पास पालकर भी कमाई की जा सकती है।

कहां से मिला प्रशिक्षण

उन्होंने बताया कि 1990 में समस्तीपुर कृषि विज्ञान केंद्र में उन्हें मधुमक्खी पालन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया गया था। इस प्रशिक्षण के बाद उन्हें मुफ्त में 10 पेटियां मिलीं और यहीं से उनका यह सफर शुरू हुआ। आज उनके पास 300 से अधिक पेटियां हैं, जिनसे तैयार शहद को वे थोक और खुदरा दोनों तरीके से बेचते हैं।

बिचौलियों से होता है नुकसान

राजकिशोर पटेल का कहना है कि बाजार में दुकानों पर कंपनी का शहद ₹500 में बिकता है, लेकिन बीच का ठेकेदार उनसे कम कीमत पर शहद ले जाता है और उससे ज्यादा मुनाफा कमा लेता है। इसके बावजूद खर्च काटकर वे साल भर में ₹5 लाख तक की कमाई कर लेते हैं।

परिवार का मिल रहा साथ

अब उनके दोनों बेटे भी पढ़ाई के साथ-साथ मधुमक्खी पालन में हाथ बंटाते हैं। राजकिशोर पटेल युवा किसानों को सलाह देते हुए कहते हैं कि अगर कोई खेती-किसानी में नई राह आजमाना चाहता है तो उनके पास आ सकता है। वे निशुल्क प्रशिक्षण देंगे, जिससे लोग मधुमक्खी पालन कर अच्छी कमाई कर सकेंगे।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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