पति को खोने के बाद भीख तक मांगनी पड़ी, अब आत्मनिर्भर हैं मुनक्का देवी, चला रहीं अपना कारोबार व्यापार एक महीने पहले 32
बहराइच के निबिया बेगमपुर गांव की मुनक्का देवी ने पति की मृत्यु के बाद बेहद कठिन दौर देखा, लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आज वे गाय के गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद बनाकर अपना खुद का व्यवसाय चला रही हैं।

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर आज कई महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं। ऐसी ही एक मिसाल हैं बहराइच जिले के निबिया बेगमपुर गांव की मुनक्का देवी, जिन्होंने पति की मृत्यु के बाद इतना मुश्किल दौर देखा कि पेट भरने के लिए भीख तक मांगनी पड़ी। मगर समूह का साथ मिलते ही उनकी पूरी जिंदगी बदल गई और आज वे अपना खुद का कारोबार संभाल रही हैं।

एक हादसे ने बदल दी पूरी जिंदगी

गांव की रहने वाली मुनक्का देवी पर पति के निधन के बाद मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। हालात इतने बिगड़ गए कि दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए उन्हें भीख मांगनी पड़ी। मुश्किल से गुजर-बसर हो रही थी, तभी उनकी जिंदगी में समूह की दीदी किसी मददगार की तरह आईं। आज वे सुकून भरी जिंदगी बिता रही हैं और गाय के गोबर तथा गोमूत्र से जैविक खाद तैयार कर अच्छी कमाई कर रही हैं।

समूह से जुड़ते ही दूर हुईं मुश्किलें

सरकार का राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन आज उन महिलाओं के लिए बड़ा सहारा बना है, जिनकी आमदनी का जरिया बंद हो चुका है या जो रोजगार को लेकर परेशान रहती हैं। इस योजना से जुड़कर कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रही हैं। मुनक्का देवी भी उन्हीं में से एक हैं, जो नम आंखों के साथ अपनी पूरी कहानी सुनाते नहीं थकतीं।

समूह से जुड़कर शुरू किया कारोबार

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद मुनक्का देवी इन दिनों जैविक खाद और जैविक काढ़ा बनाने का काम कर रही हैं। धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई और अब वे पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं तथा अपने घर-परिवार का खर्च बड़े आराम से चला रही हैं। गांव के लोग आज उन्हें देखकर प्रेरणा ले रहे हैं और हजारों किसान उनसे जुड़कर उन्नत खेती की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।

किसानों की जमीन भी बन रही उपजाऊ

मृदा संजीवनी जैविक खाद और फसलों की बढ़वार के लिए जैविक काढ़ा अपनाकर किसान अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं और खेती पर होने वाले खर्च में सीधी कटौती कर रहे हैं। इससे न केवल किसानों को लाभ मिल रहा है, बल्कि उनकी जमीन भी उपजाऊ बन रही है। लंबे समय तक कीटनाशकों के इस्तेमाल से फसल को नुकसान तो होता ही है, साथ ही खेत भी धीरे-धीरे बंजर हो जाता है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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