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5 घंटे पहले
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विचारों
कहते हैं कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो न तो कम पढ़ाई-लिखाई आड़े आती है और न ही सीमित साधन रास्ता रोक पाते हैं। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से एक ऐसी ही प्रेरक मिसाल सामने आई है। यहां के विकासखंड परसपुर के तुलसीपुर गांव में रहने वाली एक आम गृहिणी विमला मौर्य ने अपने घर की खाली पड़ी जमीन का इतना बेहतरीन इस्तेमाल किया कि आज वे आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
घर की खाली जमीन बनी हरा-भरा किचन गार्डन
विमला ने अपने घर के आसपास की खाली जगह को एक शानदार और हरे-भरे किचन गार्डन में तब्दील कर दिया है। इससे न सिर्फ उनके परिवार को रोजाना खाने के लिए ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल रही हैं, बल्कि अच्छी-खासी आमदनी भी हो रही है।
पांचवीं तक पढ़ी, मार्गदर्शन से बदली राह
विमला मौर्य बताती हैं कि उन्होंने सिर्फ पांचवीं कक्षा तक ही पढ़ाई की है। पढ़ाई के कुछ ही समय बाद उनकी शादी हो गई और वे घर-गृहस्थी संभालने में लग गईं। एक आम गृहिणी की तरह जीवन बिता रही विमला को दीनदयाल शोध संस्थान, केवीके गोपाल ग्राम की गृह वैज्ञानिक डॉ. ममता त्रिपाठी से मिलने का अवसर मिला।
डॉ. ममता ने ही उन्हें किचन गार्डन के फायदे समझाए और सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में विमला ने महज शौक के तौर पर कुछ पौधे लगाए थे, लेकिन जब पौधों की अच्छी बढ़त हुई और घरेलू इस्तेमाल के लिए ताजी सब्जियां मिलने लगीं, तो उनका हौसला और बढ़ गया। आज वे करीब दो से तीन बीघा के बड़े रकबे में बेहतरीन ढंग से किचन गार्डन चला रही हैं।
बगीचे में उगती हैं तरह-तरह की सब्जियां
विमला ने अपने इस बगीचे में टमाटर, भिंडी, लौकी, तोरई, मिर्च, बैंगन, अरबी (घुइयां), बोड़ा और हरा धनिया जैसी कई सब्जियां लगा रखी हैं।
रसायन से दूरी, केवल जैविक खाद का इस्तेमाल
विमला बताती हैं कि वे हर दिन समय पर पौधों को पानी देती हैं और आसपास उगने वाली खरपतवार को साफ करती हैं। सबसे अहम बात यह है कि वे किसी भी तरह की रासायनिक खाद या केमिकल का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं करतीं। अपने खेतों में वे सिर्फ गोबर की खाद और घर पर ही तैयार होने वाली जैविक खाद डालती हैं, जिससे उनकी सब्जियां सेहत के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित और बेहद स्वादिष्ट होती हैं।
परिवार का सहारा बना किचन गार्डन
विमला के लिए यह किचन गार्डन अब केवल घर की जरूरत पूरी करने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि कमाई का मुख्य जरिया बन चुका है। बड़े स्तर पर सब्जियां उगाने के कारण अब वे इन्हें स्थानीय बाजार में भी सप्लाई करती हैं। उनके पति पिछले 4 सालों से काफी बीमार चल रहे हैं।
इस कठिन दौर में उनके किचन गार्डन से इतनी अच्छी कमाई हो जाती है कि वे अपने बच्चों की देखभाल बेहतर तरीके से कर पा रही हैं, घर का पूरा खर्च चला रही हैं और इसी आमदनी से अपने बीमार पति का इलाज भी करा रही हैं।
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