देसी गाय की बेहतरीन नस्लें: कम चारे और कड़ी धूप में भी बाल्टी भरकर दूध देंगी ये गायें, समझें थारपारकर-साहीवाल की खूबियां राजस्थान एक घंटा पहले 2
थारपारकर, साहीवाल, गिर, लाल सिंधी, राठी और कांकरेज जैसी देसी नस्लें भीषण गर्मी और सीमित चारे में भी रोज़ 10 से 20 लीटर तक दूध देकर पशुपालकों के लिए वरदान बन रही हैं। इनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और गर्मी झेलने की ताकत इन्हें डेयरी किसानों की पहली पसंद बनाती है।

भीषण गर्मी और सूखे की मार झेल रहे पश्चिमी राजस्थान समेत पूरे देश में देसी गायों की नस्लें पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रही हैं। थारपारकर, साहीवाल, गिर, लाल सिंधी, राठी और कांकरेज जैसी नस्लें 48 से 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान, कम पानी और सीमित चारे में भी हर दिन 10 से 20 लीटर तक दूध दे रही हैं। बेजोड़ रोग प्रतिरोधक क्षमता और गर्मी सहन करने की ताकत के चलते ये गायें अब डेयरी किसानों की पहली पसंद बन चुकी हैं।

थारपारकर: रेगिस्तान की सबसे उपयोगी दुग्ध नस्ल

थारपारकर गाय को रेगिस्तानी इलाकों की सबसे उपयोगी दुग्ध नस्ल माना जाता है। इसका शरीर गर्म जलवायु के अनुरूप बेहद अनुकूल होता है और यह 45 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी स्वस्थ बनी रहती है। यह गाय रोज़ 12 से 18 लीटर तक दूध देने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि कम पानी और सीमित चारे की उपलब्धता में भी इसके दूध उत्पादन पर कोई फर्क नहीं पड़ता, यही वजह है कि यह पश्चिमी राजस्थान के पशुपालकों की पहली पसंद बनी हुई है।

साहीवाल: ऊंचे दूध उत्पादन के लिए मशहूर

साहीवाल गाय अपनी अधिक दुग्ध उत्पादन क्षमता और मजबूत रोग प्रतिरोधक शक्ति के लिए पहचानी जाती है। यह नस्ल हर दिन 15 से 20 लीटर तक दूध देने में सक्षम है। गर्मी, उमस और कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी इसका दूध उत्पादन स्थिर बना रहता है, इसी कारण देशभर के डेयरी किसानों के बीच इसकी भारी मांग रहती है।

लाल सिंधी: आकर्षक रंगत और गर्मी सहने की क्षमता

लाल सिंधी गाय अपनी आकर्षक लाल रंगत और गर्मी झेलने की अनूठी क्षमता के लिए जानी जाती है। यह नस्ल आमतौर पर 12 से 18 लीटर तक दूध देने में सक्षम है और इसकी शारीरिक संरचना इसे ऊंचे तापमान में भी आसानी से ढलने में मदद करती है। यही वजह है कि शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाकों में इसे बड़े पैमाने पर पाला जाता है।

गिर: गुजरात की प्रसिद्ध दुधारू नस्ल

गुजरात की मशहूर गिर गाय अपने लंबे कानों और विशिष्ट शारीरिक बनावट के लिए जानी जाती है। यह नस्ल 15 से 20 लीटर तक दूध देने में सक्षम है और गर्म व शुष्क जलवायु में भी सहजता से ढल जाती है। यही कारण है कि बाड़मेर, जैसलमेर और गुजरात के भुज में गिर नस्ल का पालन तेजी से बढ़ रहा है।

राठी: गर्म जलवायु में बेहतर प्रदर्शन

बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ इलाके में पाई जाने वाली राठी गाय गर्म जलवायु में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रसिद्ध है। यह नस्ल रोज़ 10 से 15 लीटर तक दूध उत्पादन करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि कम चारे और कठिन परिस्थितियों में भी इसका दूध उत्पादन और उपयोगिता बरकरार रहती है।

कांकरेज: मजबूत शरीर और लंबी उम्र

गुजरात और राजस्थान के कुछ हिस्सों में पाई जाने वाली कांकरेज नस्ल गर्मी सहने में बेहद कुशल मानी जाती है। यह गाय हर दिन 10 से 15 लीटर तक दूध देने में सक्षम है। साथ ही, इसकी शारीरिक मजबूती और लंबी उम्र इसे पशुपालकों के लिए एक बेहद फायदेमंद विकल्प बनाती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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