35 दिनों के इंतजार के बाद विक्रमशिला सेतु पर लौटी रफ्तार, BRO के बेली ब्रिज से शुरू हुआ आवागमन बिहार एक घंटा पहले 3
गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु पर करीब 35 दिनों बाद वाहनों का परिचालन फिर शुरू हो गया है। बीआरओ द्वारा तैयार बेली ब्रिज का उद्घाटन कर सेतु को हल्के वाहनों के लिए वन-वे व्यवस्था के साथ खोल दिया गया।

कोसी और सीमांचल के लाखों लोगों के लिए रविवार का दिन राहत और खुशी की सौगात लेकर आया। उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु पर करीब 35 दिनों बाद वाहनों की आवाजाही एक बार फिर बहाल हो गई है। एक महीने से अधिक समय तक पुल बंद रहने के कारण आम लोगों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, जो अब खत्म होती दिख रही है।

35 दिनों का संकट खत्म, सेतु फिर शुरू

बिहार के अंग क्षेत्र, कोसी और सीमांचल के लोगों के लिए यह दिन बेहद खास रहा। आज सुबह बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेंद्र ने पुल पर नवनिर्मित बेली ब्रिज का फीता काटकर औपचारिक उद्घाटन किया। इसके तुरंत बाद आम लोगों और हल्के वाहनों की आवाजाही के लिए सेतु को खोल दिया गया।

पिछले 35 दिनों से भीषण जाम और आवागमन ठप होने की मार झेल रहे स्थानीय निवासियों ने इस मौके पर जश्न मनाया और राहत की सांस ली। फिलहाल कुछ नियमों के साथ सेतु को आम जनता के लिए खोला गया है और इस पर वन-वे व्यवस्था लागू रहेगी। खास बात यह है कि पुल की रोजाना ड्रोन से निगरानी की जाएगी।

जब टूट गई थी लाइफलाइन

यह पूरी कहानी बीआरओ की काबिलियत और प्रशासनिक मुस्तैदी के बेहतरीन तालमेल की मिसाल है। बीते 3 मई की रात को विक्रमशिला सेतु के पिलर नंबर 2 और 3 के बीच का एक बड़ा आरसीसी स्लैब अचानक टूटकर धंस गया था। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने तत्काल भारी और हल्के वाहनों की एंट्री पर रोक लगा दी थी।

इस हादसे के बाद भागलपुर का संपर्क उत्तर बिहार के साथ-साथ झारखंड और बंगाल से पूरी तरह कट गया था। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर छोटी नावों और जहाजों के सहारे गंगा पार करने को मजबूर थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र से मदद मांगी, जिसके बाद बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (BRO) को इस काम पर लगाया गया।

बीआरओ का 'वॉर लेवल' पर काम

बीआरओ की 100 सदस्यीय विशेष इंजीनियरों और जवानों की टीम ने इस भारी-भरकम काम को एक मिशन के रूप में लिया और दिन-रात बिना रुके 'वॉर लेवल' यानी युद्ध स्तर पर काम किया। आमतौर पर किसी बड़े आरसीसी और हैंगर ट्रस पुल के टूटे हिस्से को दुरुस्त करने में महीनों लग जाते हैं।

लेकिन बीआरओ के जवानों ने महज 35 दिनों के भीतर पूरे मलबे को साफ कर वहां एक या दो नहीं, बल्कि पूरे चार मजबूत बेली ब्रिज असेंबल कर खड़े कर दिए। भारत के सिविल इंजीनियरिंग इतिहास में इसे अपने आप में एक अनोखा और दुर्लभ प्रयोग माना जा रहा है, जहां एक बड़े कंक्रीट पुल के ऊपर इतनी तेजी से स्टील का बेली ब्रिज सुपरस्ट्रक्चर तैयार किया गया।

सुरक्षा जांच और नए नियम

पुल को आम जनता के लिए खोलने से पहले शनिवार को भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और बीआरओ की संयुक्त टीम ने इस पर भारी ट्रकों को दौड़ाकर फाइनल ट्रायल रन किया था। सुरक्षा जांच में बेली ब्रिज पूरी तरह खरा उतरा, जिसके बाद आज इसे हरी झंडी दिखाई गई।

सुरक्षा कारणों से फिलहाल इस ब्रिज से केवल छोटे और हल्के वाहन जैसे कार, ऑटो, बाइक और एंबुलेंस को ही गुजरने की अनुमति दी गई है। बड़े कमर्शियल और मालवाहक वाहनों के लिए अधिकतम 10 टन की वजन सीमा तय की गई है। ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए पुल पर वन-वे सिस्टम लागू किया गया है।

भागलपुर के बाजार और जनता में खुशी

विक्रमशिला सेतु के दोबारा चालू होने से न सिर्फ यात्रियों का सफर आसान होगा, बल्कि भागलपुर की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी रफ्तार मिलेगी। पिछले एक महीने से शहर की मंडियों में फल, हरी सब्जियां और दूध की आपूर्ति ठप रहने से आम जनता महंगाई से परेशान थी। अब बेली ब्रिज के एक्टिव होते ही जरूरी सामानों की सप्लाई चेन फिर से सामान्य हो जाएगी।

प्रशासन ने ट्रैफिक नियमों का पालन कराने के लिए पुल के दोनों छोरों पर अस्थायी पुलिस पिकेट और एक हाई-टेक कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है। बीआरओ के इस ऐतिहासिक प्रयास ने भागलपुर को समय से पहले एक बेहद जरूरी और खूबसूरत तोहफा दे दिया है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!