राजस्थान
एक घंटा पहले
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विचारों
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के बलौदा गांव की रहने वाली संतोष कंवर के लिए पिछले तीस साल हर दिन एक ही उम्मीद के साथ बीते हैं — कि शायद आज उनके लापता सैनिक पति घर लौट आएं। उनके पति नौरंग सिंह शेखावत वर्ष 1995 में सेना से लापता हो गए थे और आज तक उनका कोई पता नहीं चल सका है।
तीन दशक का इंतजार
संतोष कंवर तीन दशक से अपने पति के लौटने की राह देख रही हैं। उनकी निगाहें आज भी घर के दरवाजे पर टिकी रहती हैं। जिस सैनिक ने देश की सेवा की, उसके लापता होने के बाद से परिवार लगातार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन अब तक राहत नसीब नहीं हुई।
न पेंशन, न स्थायी मदद
परिवार का आरोप है कि नौरंग सिंह के लापता होने के बाद उन्हें न तो किसी प्रकार की पेंशन दी गई और न ही किसी तरह की स्थायी सहायता मुहैया कराई गई। इस उपेक्षा ने परिवार की मुश्किलें और बढ़ा दीं।
जमीन बेचकर निभाई जिम्मेदारियां
आर्थिक तंगी के बीच संतोष कंवर ने अपने बच्चों की परवरिश की और बेटी की शादी का खर्च उठाया। इन जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उन्हें अपनी 15 बीघा जमीन तक बेचनी पड़ी।
2021 में बना डेथ सर्टिफिकेट
वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार 2021 में नौरंग सिंह का मृत्यु प्रमाण पत्र (डेथ सर्टिफिकेट) बन सका। इसके बावजूद परिवार को अब तक कोई राहत नहीं मिल पाई है और संतोष कंवर का संघर्ष आज भी जारी है।
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