उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में अगर आप जायके का असली आनंद लेना चाहते हैं तो यहां का हींग वाला चाट आपके लिए बेहद खास साबित हो सकता है। बीते 10 सालों से यह चाट मिर्जापुर के लोगों की पसंदीदा बना हुआ है। इसे बनाने में किसी महंगे या आम सामान का नहीं, बल्कि कुछ खास सीक्रेट मसालों का इस्तेमाल होता है। शुद्धता का पूरा ख्याल रखते हुए इन मसालों को घर पर तैयार किया जाता है, जो इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देते हैं। इसी जायके की दीवानगी का आलम यह है कि इसे चखने के लिए पूर्वांचल भर से लोग यहां पहुंचते हैं।
पिता के जमाने से चली आ रही है दुकान
हींग का चाट बनाने वाले धीरज गुप्ता बताते हैं कि यह दुकान उनके पिता के समय से चली आ रही है। हींग वाले चाट के लिए मसाला उनके पिता ही तैयार करते हैं, जिसमें शुद्ध हींग का प्रयोग किया जाता है। इसके साथ ही गरम मसाला और कुछ सीक्रेट मसाले भी होते हैं, जिन्हें उनके पिता घर पर ही बनाते हैं। इन्हीं मसालों के इस्तेमाल से वे लोग हींग के छोले और चाट तैयार करते हैं, जो लोगों को बेहद पसंद आ रहा है।
30 रुपए कुल्हड़ की दर से बिक्री
इस चाट की बिक्री 30 रुपए प्रति कुल्हड़ की दर से की जा रही है। पिछले 10 सालों से यह दुकान लग रही है और यहां काफी संख्या में लोग कुल्हड़ वाले हींग चाट का स्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं।
भदोही से भी आते हैं स्वाद के शौकीन
चाट खाने आए ग्राहक अनिल ने बताया कि वे भदोही जिले के रहने वाले हैं। मिर्जापुर जिले में जब भी आते हैं, तो इस चाट का स्वाद चखे बिना नहीं लौटते। उनके मुताबिक स्वाद बेहद लाजवाब है और दाम भी बहुत कम है। अनिल कहते हैं कि स्वाद के हिसाब से कीमत काफी कम रखी गई है, ज्यादा पैसा नहीं लिया जाता। दुकान शाम 5 बजे लगती है और उन्हें इंतजार रहता है कि कब दुकान खुले और हींग वाली चाट खाने का मौका मिले। उनका कहना है कि इसे बेहद अच्छे तरीके से तैयार किया जाता है, जो इसे और बेहतर बना देता है।
नंबर लगाने के बाद मिलता है स्वाद
एक अन्य ग्राहक आशीष ने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से हींग वाले छोले और चाट का आनंद ले रहे हैं। जब से दुकान खुली है, तभी से वे यहां आ रहे हैं। उनका कहना है कि पहली बार जब वे दुकान पर आए तो स्वाद बेहद अच्छा लगा और उसके बाद से वे लगातार आते रहे हैं। आशीष कहते हैं कि हींग वाले छोले और चाट खाने के बाद भले ही पेट भर जाए, लेकिन मन नहीं भरता और इसे बार-बार खाने का जी करता है। यही वजह है कि दुकान पर अक्सर काफी भीड़ रहती है और नंबर लगाने के बाद ही छोले और चाट नसीब हो पाते हैं।
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