इस अफ्रीकी जनजाति में महिलाओं को मिली बेमिसाल आजादी, सजे-संवरे मर्दों में से खुद चुनती हैं साथी, कर सकती हैं एक से ज्यादा शादियां विश्व एक घंटा पहले 3
अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में रहने वाली खानाबदोश वोडाबे जनजाति के गेरेवोल महोत्सव में पुरुष घंटों सजते-संवरते हैं और महिलाएं उनमें से अपना पसंदीदा साथी चुनती हैं। यहां महिलाओं को प्रेम और विवाह में असाधारण स्वतंत्रता हासिल है।

आज की दुनिया भले ही कितनी भी आधुनिक हो गई हो, लेकिन ज्यादातर देशों में महिलाओं को अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने की आजादी अब भी नहीं है। इसके उलट अफ्रीका में एक ऐसी जनजाति भी मौजूद है, जहां महिलाओं को पुरुषों से कहीं ज्यादा स्वतंत्रता दी गई है। यहां सजे-धजे पुरुषों की भीड़ में से महिलाएं अपना मनपसंद साथी चुनती हैं और इसके लिए उन्हें कई विकल्प भी मिलते हैं। अगर पहली बार में उन्हें सच्चा प्यार न मिले, तो वे एक से ज्यादा शादियां भी कर सकती हैं।

साहेल के रेगिस्तान में बसी अनोखी दुनिया

सहारा के सुनसान रेगिस्तानों और हरे-भरे घास के मैदानों के बीच, अफ्रीका के साहेल क्षेत्र में एक अनूठी दुनिया बसी है। यहां की धूल भरी हवाओं और अनंत क्षितिज के बीच घूमता एक खानाबदोश समुदाय रहता है, जिसे वोडाबे कहा जाता है। पशुपालन की प्राचीन परंपराओं, स्वतंत्र जीवनशैली और खास सांस्कृतिक विरासत के लिए पहचाने जाने वाले वोडाबे लोग दुनिया की निगाहों में तब आए, जब उनके गेरेवोल महोत्सव की चर्चा हुई।

गेरेवोल: प्रेम और सौंदर्य का जादुई उत्सव

गेरेवोल कोई आम त्योहार नहीं, बल्कि प्रेम का एक जादुई उत्सव है, जहां सौंदर्य, नृत्य और प्रेम की आजादी एक साथ थिरकती है। हर साल बारिश के मौसम के अंत में, जब धरती हरी-भरी हो उठती है, तब वोडाबे कबीले एक जगह जुटते हैं। चाड और नाइजर के कुछ चुनिंदा इलाकों में होने वाला यह आयोजन पूरे साल का उनका सबसे बड़ा और सबसे रोमांचक उत्सव होता है।

यह सिर्फ नृत्य और सजावट का मेला नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, निजी पसंद और प्रेम की आजादी का जीवंत प्रतीक है। यहां परंपराएं बिल्कुल उलट जाती हैं। जिस दुनिया में आमतौर पर महिलाएं सौंदर्य का केंद्र मानी जाती हैं, वहां वोडाबे पुरुष किसी राजकुमार की तरह खुद को सजाते-संवारते हैं।

घंटों मेकअप करके आते हैं पुरुष

इस पूरी प्रक्रिया की तैयारी घंटों चलती है। पुरुष अपने चेहरे पर चमकीले पीले, लाल और सफेद रंग लगाते हैं। आंखों को बड़ा और आकर्षक दिखाने के लिए काजल लगाते हैं, होंठों को सुंदर आकार देते हैं और पारंपरिक रंग-बिरंगे वस्त्र पहनकर खुद को सजाते हैं। वे बिल्कुल महिलाओं की तरह घंटों श्रृंगार करके यहां पहुंचते हैं।

उनके गले में मनके, सिर पर पंख और कमर में चमड़े की पट्टियां सजी होती हैं। हर चीज उनकी मर्दानगी और कबीली गौरव को निखारने के लिए होती है। वोडाबे संस्कृति में पुरुष सौंदर्य के अपने अलग मापदंड हैं—लंबी कद-काठी, दूध जैसे सफेद दांत, चमकती आंखें, पतली नाक और होंठ तथा नुकीली ठोड़ी। इन खूबियों को और उभारने के लिए वे चेहरे पर सफेद रेखाएं खींचते हैं। यह सजावट महज दिखावा नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और गर्व का प्रतीक है।

यहां साथी चुनने का हक महिलाओं के पास

गेरेवोल की सबसे अनोखी बात यहां की महिलाओं की स्वतंत्रता है। वोडाबे समाज में महिलाओं को प्रेम और विवाह में असाधारण आजादी मिली हुई है। शादी के बाद भी एक महिला अपने पति को छोड़कर नया साथी चुन सकती है। यहां एक से अधिक पति रखने की परंपरा भी है। जब तक उन्हें सच्चा साथी न मिल जाए, वे नया संबंध बनाती रह सकती हैं। यह आजादी दुनिया के अधिकांश समाजों में दुर्लभ है और यही गेरेवोल को खास बनाती है।

याके नृत्य में छिपा है असली जादू

महोत्सव का असली जादू याके नृत्य में छिपा है। सूरज ढलते ही पुरुष एक कतार में खड़े हो जाते हैं। उनके चेहरे रंगों से दमकते हैं और शरीर लय में झूमता है। वे गाते हैं, आंखें घुमाते हैं, मुस्कान बिखेरते हैं और अपनी आकर्षक मुद्राओं से महिलाओं को मोहित करते हैं।

घंटों चलने वाले इस नृत्य में पुरुष अपनी सुंदरता, ताकत और आकर्षण का प्रदर्शन करते हैं। महिलाएं ध्यान से उन्हें देखती हैं और आखिर में तीन महिलाएं सबसे आकर्षक पुरुष को चुनती हैं। जिस पुरुष को चुना जाता है, उसके लिए यह सम्मान का सबसे बड़ा पल होता है। कबीले में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ जाती है और नई प्रेम कहानियों की नींव पड़ती है।

पर्यटन से अब भी दूर है यह आयोजन

हवा में गूंजते पारंपरिक गीत, रंग-बिरंगे परिधान, सम्मोहक नृत्य मुद्राएं और हवाओं में बिखरा प्रेम—यह सब मिलकर एक अविस्मरणीय दृश्य रचते हैं। यह पूरा मेला सौंदर्य और प्रेम का उत्सव है। गेरेवोल आज भी बड़े पैमाने पर पर्यटन से दूर है। चंद बाहरी लोग ही इसे देख पाते हैं, लेकिन जो भी इसे देखता है, वह हमेशा के लिए इसके मोहपाश में बंध जाता है। यह महोत्सव सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता, प्रेम और सौंदर्य की मिसाल है। वोडाबे के गेरेवोल में दुनिया यह देख सकती है कि प्रेम की कोई सीमा नहीं होती और वह रंगों, नृत्य तथा आजादी की भाषा बोलता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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