उपनाम: स्वरोजगार
नौकरी छोड़ गांव लौटा युवा, ‘उपसरपंच चाय’ से बनाई अलग पहचान, बन गया मिसाल
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर के एक युवक ने कतर की नौकरी छोड़कर मुंबई में मिले आइडिया से प्रेरित होकर अपने गांव में ‘उपसरपंच चाय’ नाम से स्टार्टअप शुरू किया और आज रोजाना सैकड़ों कप चाय बेचकर खुशहाल जीवन जी रहा है।
घर की कला बनी वैश्विक पहचान, सऊदी अरब से लंदन तक गूंज रहा इस परिवार के हुनर का नाम
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत ₹500000 का लोन लेकर शुरू किए गए बुटीक की कारीगरी आज सऊदी अरब, अमेरिका और लंदन तक पसंद की जा रही है, जिससे हर साल तीन से चार लाख रुपए की कमाई हो रही है।
सरकारी पौधों से बदली किस्मत: आम बेचकर रोज 1000 से 1200 रुपये कमा रहीं देवघर की महिलाएं
देवघर के रिखिया प्रखंड की करीब 50 महिलाएं बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत आम की बागवानी से जुड़कर हर दिन 1000 से 1200 रुपये तक कमा रही हैं। कभी परिवार की आमदनी पर आश्रित रहने वाली ये महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बन गई हैं।
घर से शुरू किया छोटा काम, अपनी कमाई से खरीद ली ईको गाड़ी; हेमलता साहू बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल
बिलासपुर के सुलौनी गांव की हेमलता साहू ने स्व-सहायता समूह की मदद से घर से छत्तीसगढ़ी उत्पाद बनाकर हर महीने 30 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की और अपनी कमाई से ईको गाड़ी खरीदी। उनकी कहानी स्वरोजगार का सपना देखने वाली ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई...
अमेठी के 13 ब्लॉकों में पहुंचेगी आरसेटी की टीम, गांव-गांव सिखाएगी रोजगार और बिजनेस के गुर
आरसेटी की विशेषज्ञ टीम अमेठी के 13 विकासखंडों के हर गांव में जाकर लोगों को उनकी रुचि के मुताबिक बिजनेस का मुफ्त प्रशिक्षण देगी, जिससे वे कम लागत में अपना रोजगार शुरू कर सकें।
डिजाइनिंग के शौक से बदली किस्मत, हर महीने हजारों रुपये कमा रही हैं यह महिला
रांची की प्रीति ने बचपन के डिजाइनिंग शौक को कारोबार में बदला और गुल्लक की बचत से हैंडबैग बनाने का काम शुरू कर आज हर महीने हजारों रुपये कमा रही हैं।
गाय के गोबर से चार-पांच नहीं, 15 तरह के उत्पाद बना रहे अरविंद, बिहार से लेकर राजस्थान तक मांग
मुजफ्फरपुर के अरविंद कुमार मिश्रा गाय के गोबर, गोमूत्र और पंचगव्य से करीब 15 तरह के उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जिनकी मांग अब बिहार के कई जिलों के साथ-साथ राजस्थान समेत दूसरे राज्यों से भी आने लगी है।
गाय के दूध से मां को मिली राहत, असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी छोड़ शुरू किया गौ सेवा धाम, आज बनीं मिसाल
एमसीए की पढ़ाई के बाद चार साल असिस्टेंट प्रोफेसर रहीं कल्पना कुमावत ने स्थायी नौकरी छोड़कर महज पांच गिर गायों से अपना सफर शुरू किया, जो आज 60 से अधिक गायों तक पहुंच चुका है। ऑर्गेनिक डेयरी मॉडल के जरिए वे जयपुर में रोजाना 100 लीटर से ज्यादा शुद्ध दूध पहुं...
बहराइच की रीता देवी 22000 की मशीन से बना रहीं रूई की पूजा बत्ती, 10 रुपये के पैक से अच्छी कमाई
बहराइच के पयागपुर की रीता देवी 22000 रुपये की मशीन से रूई की पूजा बत्ती तैयार कर रही हैं और इसे 10 रुपये प्रति पैकेट बेचकर अच्छा मुनाफा कमा रही हैं।
जहानाबाद की पहचान बना चनाचूर, सैदपुर गांव के 25 घरों में तैयार होता है ट्रेन का यह मशहूर नाश्ता, महिलाएं संभाल रहीं रोजगार की कमान
जहानाबाद के मखदुमपुर प्रखंड स्थित सैदपुर गांव में करीब 20 से 25 घरों में चनाचूर बनाया जाता है, जो ट्रेनों और स्टेशनों पर खूब बिकता है। इस घरेलू कारोबार के जरिए गांव की महिलाएं अपने परिवार की आजीविका चला रही हैं।
कम लागत में अंडे का थोक कारोबार बना सकता है लखपति, जानें शुरुआत का पूरा तरीका
अंडे की पूरे साल बनी रहने वाली मांग ने थोक कारोबार को कम पूंजी में बड़ी कमाई वाला विकल्प बना दिया है। एक थोक व्यवसायी के मुताबिक करीब 50 हजार रुपये से इसे शुरू किया जा सकता है।
लुधियाना में मजदूरी से बिहार में अपनी कंपनी तक: 12वीं पास शंभू ने 50 हजार से शुरू कर 30 लाख का टर्नओवर खड़ा किया
जहानाबाद के शंभू कुमार ने 12वीं के बाद नौकरी छोड़कर सिर्फ 50 हजार रुपये से कपड़ा उद्योग शुरू किया और आज उनका सालाना टर्नओवर 30 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। PMEGP स्कीम की मदद से उनका कारोबार अब 7 जिलों में फैला है और दर्जनों लोगों को रोजगार दे रहा है।
सक्सेस स्टोरी: फौज से रिटायर होकर असली फल-सब्जियों जैसी मोमबत्तियां गढ़ रहे बागेश्वर के नारायण दत्त, कमाई सुनकर चौंक जाएंगे
बागेश्वर के नैनी गांव के पूर्व सैनिक नारायण दत्त फल और सब्जियों की हूबहू नकल जैसी सजावटी मोमबत्तियां बनाकर त्योहारी सीजन में हर महीने 2 से 3 लाख रुपये कमा रहे हैं और गांव की महिलाओं को रोजगार भी दे रहे हैं।
मजाक में लगी थी पहली हाट, अब हर गुरुवार हजारों का कारोबार — महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की कहानी
चैनपुर के चेडाबार गांव में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा 2022 में शुरू किया गया ग्रामीण हाट आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गया है, जहां हर गुरुवार सब्जियों से लेकर रोजमर्रा का सामान बिकता है।
जंगली आम के छिलकों से बन रहा आमचूर, सरगुजा के ग्रामीणों को मिल रही पक्की कमाई
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर क्षेत्र में ग्रामीण आम के छिलके सुखाकर आमचूर बना रहे हैं, जो बाजार में 100 से 120 रुपये प्रति किलो तक बिकता है और परिवारों को अतिरिक्त आमदनी दे रहा है।