लौकी पर अनोखी कारीगरी! बस्तर का तुंबा आर्ट बना पहचान, देश-विदेश तक फैली चमक व्यापार एक महीने पहले 15
बस्तर में सूखी लौकी पर नक्काशी कर उसके भीतर रोशनी लगाकर तैयार किया जाने वाला तुंबा आर्ट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह आकर्षक सजावटी लैंप बाजार में 200 से 1000 रुपये तक बिकता है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर में सूखी लौकी से बनने वाली सजावटी कलाकृतियां इन दिनों खूब चर्चा में हैं। इस अनूठी कला को यहां तुंबा आर्ट के नाम से जाना जाता है, जिसमें लौकी की सतह पर बारीक नक्काशी कर उसके भीतर रोशनी लगाई जाती है। इससे जब लैंप जलता है तो पूरा कमरा बेहद खूबसूरत नजर आता है।

बाजार में इस कला की मांग लगातार बनी रहती है। तैयार तुंबा आर्ट 200 से 1000 रुपये तक की कीमत में बिकता है। हालांकि बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद इसे बनाने वाले कारीगरों की संख्या धीरे-धीरे घटती जा रही है।

बस्तर की पहचान बनती कला

शिल्प कला और काष्ठ कला के साथ-साथ बस्तर में तुंबा आर्ट भी तैयार किया जाता है। देखने में बेहद आकर्षक यह कला घरों और कमरों की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देती है। फिलहाल यह बस्तर में आसानी से मिल जाती है और इसे ऑनलाइन भी बेचा जा रहा है। आज यह कला कई कारीगरों के लिए रोजी-रोटी का जरिया बन चुकी है।

कारीगर की जुबानी

लोकल 18 की टीम ने लौकी से तुंबा आर्ट बनाने वाली इंदुमती रावना से बातचीत की। इंदुमती बताती हैं कि तुंबा आर्ट के अलावा वे लकड़ी की काष्ठ कला का काम भी करती हैं। इस कला के लिए लौकी का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे वे या तो खुद उगाती हैं या फिर बाजार से खरीद लेती हैं। इसके बाद सजावटी सामान बनाने के लिए लौकी को अच्छी तरह सुखाया जाता है।

कैसे तैयार होती है कलाकृति

लौकी पूरी तरह सूख जाने के बाद उसके भीतर का सारा गूदा निकाल दिया जाता है। फिर उसे घिसकर फिनिशिंग दी जाती है। इसके बाद लोहे के औजारों को गर्म कर लौकी की सतह पर तरह-तरह की कलाकृतियां उकेरी जाती हैं। अलग-अलग डिजाइन के लिए अलग-अलग औजारों का उपयोग होता है, वहीं रोशनी बाहर निकलने के लिए जरूरी जगहों पर खास नक्काशी की जाती है। एक तुंबा आर्ट पर डिजाइन उकेरने में करीब एक दिन का समय लग जाता है।

जगदलपुर से बाहर तक पहुंच

इंदुमती की दुकान जगदलपुर में है, जहां से फिलहाल स्थानीय लोग तुंबा आर्ट खरीदकर ले जाते हैं। इसके अलावा प्रशासन की मदद से भी उनके उत्पाद बाहरी बाजारों तक पहुंचाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि अब तक उन्होंने किसी को इसका प्रशिक्षण नहीं दिया है। वे पहले से लकड़ी की काष्ठ कला में लगी हुई हैं और तुंबा आर्ट का काम उन्होंने हाल ही में शुरू किया है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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