उत्तर प्रदेश
2 घंटे पहले
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विचारों
कहा जाता है कि कामयाबी के लिए सिर्फ ऊंची डिग्री नहीं, बल्कि मेहनत और लगन जरूरी होती है। इसी बात को गोंडा जिले के विकासखंड पंडरी कृपाल की रहने वाली पूजा ने सच कर दिखाया है। सिर्फ आठवीं तक पढ़ी पूजा ने अपने घर से अचार बनाने का छोटा-सा काम शुरू किया था, जो आज उनकी अच्छी आमदनी का जरिया बन गया है। इस कारोबार से वह हर महीने ठीक-ठाक कमाई कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं।
पूजा बताती हैं कि पहले वह केवल घर का कामकाज संभालती थीं। परिवार की आमदनी सीमित होने के कारण घर का खर्च चलाना आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने कुछ अलग करने की ठानी। पारंपरिक तरीके से स्वादिष्ट अचार बनाना उन्हें आता था, इसलिए उन्होंने इसी हुनर को रोजगार में बदलने का फैसला किया।
संजू मिश्रा से मिली प्रेरणा
पूजा कहती हैं कि आठवीं तक पढ़ाई करने के बाद उनकी शादी हो गई और वह गृहिणी बन गईं। इसके बाद उनकी मुलाकात संजू मिश्रा से हुई, जिन्होंने सुझाव दिया कि जब वह अचार बना ही लेती हैं तो इसका कारोबार क्यों न शुरू करें। यहीं से अचार के व्यवसाय की नींव पड़ी।
वह बताती हैं कि घर पर वह पहले थोड़ा-बहुत अचार बना लेती थीं। संजू मिश्रा को इस बारे में बताने पर उन्होंने सारी विधि सिखाई और आज वह पूरी तरह अचार के कारोबार में जुटी हैं। पूजा के मुताबिक, संजू मिश्रा के साथ जुड़कर वह अक्षरा अचार ब्रांड भी चला रही हैं। इस काम में उन्हें घर के सभी लोगों का सहयोग मिला, सबसे ज्यादा साथ उनके पति ने दिया। आगे चलकर वह और कई तरह के अचार बनाना चाहती हैं, जिसकी ट्रेनिंग भी वह ले रही हैं।
किन अचारों की रहती है सबसे ज्यादा मांग
पूजा बताती हैं कि उनके यहां सबसे ज्यादा मांग मिक्स अचार, कटहल का अचार, जिमीकंद का अचार, हरी मिर्च का अचार और लहसुन के अचार की रहती है। शुरुआत में उन्होंने घर पर ही आम, नींबू, मिर्च और मिश्रित सब्जियों का अचार बनाना शुरू किया था। पहले वह यह अचार आसपास के लोगों और रिश्तेदारों को बेचती थीं। उनके हाथ का बना अचार लोगों को पसंद आने लगा और धीरे-धीरे मांग बढ़ती चली गई।
बढ़ती मांग को देखते हुए उन्होंने उत्पादन भी बढ़ा दिया। उनके मुताबिक, इस समय उनके यहां करीब 15 से 20 प्रकार के अचार बनाए जाते हैं। पूजा का कहना है कि अचार बनाने में गुणवत्ता का खास ध्यान रखा जाता है और सभी मसालों व सामग्री का चयन सावधानी से किया जाता है, ताकि स्वाद और गुणवत्ता बरकरार रहे। यही वजह है कि उनके अचार की मांग लगातार बढ़ रही है। आज उनके ग्राहक केवल गांव और जिले तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दूसरे इलाकों से भी लोग उनसे अचार मंगवाते हैं।
6 महिलाएं मिलकर संभालती हैं काम
पूजा बताती हैं कि कुल मिलाकर 5 से 6 महिलाएं साथ मिलकर यह काम करती हैं। इस आमदनी से उनके परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं। इसके साथ ही वह दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
उनका मानना है कि अगर महिलाओं में आत्मविश्वास और कुछ कर गुजरने की इच्छा हो तो वे घर बैठे भी अपना कारोबार शुरू कर सकती हैं। पूजा कहती हैं कि अचार के इस व्यवसाय से उनके बच्चों की पढ़ाई और घर का पूरा खर्च आसानी से चल रहा है।
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