झारखंड
4 दिन पहले
17
विचारों
बोकारो के कुमारडुबी निवासी 65 वर्षीय अजय कुमार मिश्रा बीते 45 वर्षों से घर-घर जाकर बाइक और कार की धुलाई का काम कर रहे हैं। इस पेशे के प्रति उनका जुनून आज भी जवानी के दिनों जैसा ही बरकरार है। खास बात यह है कि उनकी साइकिल अपने आप में एक चलती-फिरती वॉशिंग दुकान बन चुकी है।
उनकी साइकिल पर लंबी पाइप, प्रेशर मशीन, वाहन साफ करने का सामान, पॉलिश, ब्रश और बाकी जरूरी उपकरण हर समय लगे रहते हैं। यही सेटअप उन्हें दूसरों से बिल्कुल अलग और अनोखा बनाता है।
कितना लेते हैं चार्ज, कितनी होती है कमाई
अजय कुमार मिश्रा ने बातचीत में बताया कि वह बचपन से ही इस काम से जुड़े हुए हैं। उनका दिन सुबह 8 बजे से शुरू हो जाता है और इसी के साथ ग्राहकों के फोन भी आने लगते हैं। वह रोजाना 5 से 10 वाहनों की धुलाई कर लेते हैं।
उनकी सेवा में बाइक की धुलाई का चार्ज 150 रुपये, कार की धुलाई का 250 रुपये और बड़े कमर्शियल वाहनों की सफाई का 500 रुपये है। इस हिसाब से दिन के अंत तक उनकी 450 से 1000 रुपये तक अच्छी आमदनी हो जाती है।
काम को बना लिया अपना पैशन
परिवार के बारे में बताते हुए अजय ने कहा कि उनकी शादी नहीं हुई है और वह अपनी दीदी तथा जीजा के साथ रहते हैं। सालों की लगातार मेहनत के बाद उन्होंने इस काम को सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि अपना पैशन बना लिया है। यही वजह है कि अब किसी और काम में उन्हें संतुष्टि नहीं मिलती।
कोई दूसरा काम करने को तैयार नहीं
बढ़ती उम्र को लेकर उनकी दीदी अक्सर चिंतित रहती हैं और कई बार उन्हें कोई दूसरा काम करने की सलाह भी देती हैं। इसके बावजूद अजय आज भी अपने पसंदीदा काम को पूरी लगन के साथ कर रहे हैं।
अजय का मानना है कि हर व्यक्ति को अपने हुनर को पहचानकर उस पर मेहनत करनी चाहिए। उनके अनुसार, खुद पर भरोसा रखते हुए मेहनत करके कोई भी इंसान आत्मनिर्भर बन सकता है।
Comments
0 comment