गोंडा के वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति मकोय का अर्क बनाकर बढ़ा रहे आमदनी, जानिए तैयार करने की पारंपरिक विधि उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 32
गोंडा के मनकापुर स्थित झिलाही बाजार निवासी वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति घर पर ही पारंपरिक आसवन विधि से मकोय का अर्क तैयार कर रहे हैं, जो उनके लिए आमदनी का बेहतर जरिया बन गया है। यह अर्क बाजार में 380 रुपए प्रति लीटर के भाव पर बिक रहा है।

गोंडा जिले के विकासखंड मनकापुर अंतर्गत झिलाही बाजार के रहने वाले वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति अपने घर पर ही मकोय (मकोई) का अर्क तैयार कर रहे हैं। औषधीय पौधों के प्रति लोगों की बढ़ती दिलचस्पी के बीच यह काम उनके लिए कमाई का अच्छा साधन बन चुका है। आयुर्वेद में मकोय को एक अहम औषधीय पौधा माना जाता है और बरसों से इसे कई पारंपरिक उपचारों में इस्तेमाल किया जाता रहा है।

वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति ने बातचीत में बताया कि मकोय का अर्क बनाने की प्रक्रिया पारंपरिक आसवन (डिस्टिलेशन) पद्धति पर टिकी होती है। इस तरीके में पानी और भाप के जरिए पौधे के गुणों को अर्क के रूप में हासिल किया जाता है।

इस तरह तैयार होता है अर्क

विष्णुदत्त प्रजापति के मुताबिक सबसे पहले मकोय की ताजी पत्तियां, तना और दूसरे उपयोगी हिस्से इकट्ठा किए जाते हैं। इसके बाद इन सभी हिस्सों को साफ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है, ताकि उन पर लगी मिट्टी और दूसरी अशुद्धियां पूरी तरह हट जाएं। सफाई के बाद पौधों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है और फिर कुछ घंटों तक पानी में भिगोकर रखा जाता है, जिससे पौधे के गुण पानी में भली-भांति घुल जाएं।

इसके बाद तैयार मिश्रण को आसवन यंत्र में डाला जाता है और यंत्र को धीमी आंच पर गर्म किया जाता है। गर्म होने पर पानी और पौधों के तत्वों से भाप बनती है, जो मकोय के गुणों को अपने साथ लेकर ऊपर की ओर जाती है। एक विशेष प्रक्रिया के तहत इस भाप को ठंडा किया जाता है, जिससे वह दोबारा तरल रूप में आ जाती है। यही तरल पदार्थ मकोय का अर्क कहलाता है।

बोतलों में सुरक्षित रखा जाता है उत्पाद

वैद्य विष्णुदत्त बताते हैं कि अर्क तैयार हो जाने के बाद उसे साफ और सुरक्षित बोतलों में भरकर रखा जाता है। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए इसे स्वच्छ माहौल में तैयार करना बेहद जरूरी होता है। उनका कहना है कि मकोय से जुड़े उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है।

उनका मानना है कि ग्रामीण इलाकों में औषधीय पौधों की खेती और उनके प्रसंस्करण से किसानों तथा युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं। कम लागत में शुरू होने वाला यह काम स्वरोजगार का बेहतरीन जरिया बन सकता है।

इन बीमारियों में किया जाता है इस्तेमाल

विष्णुदत्त प्रजापति के अनुसार मकोय का अर्क पेट से जुड़ी समस्याओं में और शरीर में सूजन की स्थिति में इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि इसे सुबह खाली पेट चार चम्मच और शाम को खाना खाने से एक घंटा पहले चार चम्मच लेना चाहिए। ध्यान रहे कि चम्मच छोटा होना चाहिए।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी औषधीय अर्क या उत्पाद का इस्तेमाल करने से पहले आयुर्वेद चिकित्सक या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की राय जरूर ले लेनी चाहिए। सही जानकारी और उचित उपयोग से ही ऐसे उत्पादों का असली लाभ मिल सकता है।

आर्थिक मजबूती के साथ दूसरों को भी प्रेरणा

गोंडा के वैद्य विष्णुदत्त प्रजापति की यह पहल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत तो बना ही रही है, साथ ही क्षेत्र के दूसरे लोगों को भी स्वरोजगार की ओर प्रेरित कर रही है। उन्होंने बताया कि उनके यहां तैयार मकोय का अर्क बाजार में 380 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। उनके मुताबिक इस कारोबार से उन्हें अच्छी-खासी आमदनी हो रही है और आने वाले समय में वे इसे और आगे बढ़ाना चाहते हैं।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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