विदेश में मजदूरी करते थे सुमन, प्रशिक्षण लेकर शुरू किया मुर्गा पालन, अब 10 हजार मुर्गों से कमा रहे लाखों झारखंड एक महीने पहले 15
कोडरमा के सुमन लाल मेहता कभी दूसरे राज्यों में मजदूरी करते थे, पर आमदनी इतनी कम थी कि घर चलाना मुश्किल था। गांव लौटकर प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने मुर्गा पालन शुरू किया और अब हर महीने करीब एक लाख रुपये कमा रहे हैं।

कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड के मसनोडीह गांव के रहने वाले सुमन लाल मेहता आज क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं के लिए एक मिसाल बन गए हैं। कभी रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले सुमन ने गांव लौटकर स्वरोजगार का रास्ता अपनाया और मुर्गा पालन के व्यवसाय से अपनी आर्थिक हालत मजबूत कर ली। सभी खर्च निकालने के बाद आज वह हर महीने करीब एक लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं।

मजदूरी से नहीं चलता था घर

सुमन लाल मेहता बताते हैं कि पहले जब वह मजदूरी करते थे, तब उन्हें हर महीने सिर्फ 15 से 20 हजार रुपये ही मिल पाते थे। इतनी कम आमदनी में परिवार की जरूरतें पूरी करना बेहद कठिन था। इसी बीच उन्होंने कृषि एवं पशुपालन विभाग की ओर से बरही के गौरियाकर्मा में आयोजित आठ दिवसीय मुर्गा पालन प्रशिक्षण में भाग लिया। इस प्रशिक्षण में मिली जानकारी ने उन्हें इस व्यवसाय की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

खाली जमीन पर खड़ा किया कारोबार

प्रशिक्षण पूरा करने के बाद सुमन ने गांव की खाली पड़ी जमीन पर करीब 15 हजार वर्ग फीट का शेड तैयार कराया और व्यावसायिक स्तर पर मुर्गा पालन की शुरुआत की। फिलहाल उनके इस शेड में लगभग 10 हजार मुर्गे तैयार हो रहे हैं।

वह बताते हैं कि एक चूजा बाजार से करीब 35 रुपये में खरीदा जाता है और उसे पूरी तरह तैयार होने में 35 से 40 दिन का समय लगता है। इस अवधि में दाना, दवा और देखभाल मिलाकर प्रति चूजा करीब 100 रुपये का खर्च आता है। तैयार होने पर एक मुर्गे का वजन एक किलो या उससे ज्यादा हो जाता है, जिसकी बिक्री करीब 110 रुपये प्रति किलो की दर से होती है।

सुमन के लिए सबसे बड़ी सुविधा यह है कि उन्हें बिक्री के लिए बाजार में भटकना नहीं पड़ता। मुर्गी फार्म संचालक खुद उनके शेड पर पहुंचकर मुर्गे खरीदकर ले जाते हैं।

हर महीने करीब एक लाख की कमाई

सुमन के मुताबिक सारे खर्च निकालने के बाद उन्हें प्रति मुर्गा करीब 10 रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है। इस हिसाब से 10 हजार मुर्गों के पालन से उन्हें हर महीने करीब एक लाख रुपये की आमदनी हो जाती है। यह कमाई उनकी पुरानी मजदूरी के मुकाबले कई गुना अधिक है।

युवाओं को स्वरोजगार से जुड़ने की सलाह

अपनी सफलता से उत्साहित सुमन ने युवाओं से अपील की है कि वे रोजगार के लिए सिर्फ शहरों की ओर पलायन करने के बजाय सरकार की योजनाओं और प्रशिक्षण का लाभ उठाकर स्वरोजगार की राह चुनें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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