जरबेरा फूल की खेती ने संवारी कोडरमा के किसान की तकदीर, हर महीने हो रही 30 हजार की कमाई झारखंड 2 महीने पहले 38
कोडरमा के डोमचांच प्रखंड के किसान सुमन मेहता ने 10 हजार वर्ग फीट में ग्रीन नेट हाउस बनाकर जरबेरा फूल की खेती शुरू की और हर सप्ताह करीब 1500 फूलों के उत्पादन से लगभग 30 हजार रुपये मासिक आय अर्जित कर रहे हैं।

झारखंड के कोडरमा जिले में अब किसान परंपरागत खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों को भी तेजी से अपना रहे हैं। एक समय जहां अधिकांश किसान धान, गेहूं और मौसमी सब्जियों की उपज पर ही निर्भर रहते थे, वहीं अब कुछ किसान नई और मुनाफे वाली फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इसी कड़ी में डोमचांच प्रखंड के किसान सुमन मेहता ने अपने गांव में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर जरबेरा फूल की खेती कर एक अलग पहचान बनाई है। आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं का सहारा लेकर वे आज हर महीने लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी कर रहे हैं।

उद्यान विभाग से मिली प्रेरणा

सुमन मेहता बताते हैं कि जिला उद्यान विभाग के माध्यम से उन्हें जरबेरा फूल की खेती के लिए प्रेरित किया गया। विभाग के उद्यान मित्र ने उन्हें इस खेती से होने वाले फायदों और इसकी संभावनाओं की जानकारी दी, जिसके बाद उन्होंने इस दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया। खेती शुरू करने से पहले उन्होंने रांची में छह दिनों का विशेष प्रशिक्षण भी लिया, जहां उन्हें फूलों की खेती, पौधों की देखभाल, उत्पादन बढ़ाने के तरीकों और आधुनिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।

आधुनिक तरीके से तैयार किया खेत

प्रशिक्षण के बाद उन्होंने अपने खेत को आधुनिक ढंग से विकसित किया। करीब 10 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में ग्रीन नेट हाउस तैयार किया गया, जिसमें ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक के सहारे जरबेरा के पौधे लगाए गए। इस तकनीक से पौधों को आवश्यकता के अनुसार पानी मिलता है और खेत में खरपतवार की समस्या भी काफी हद तक कम हो जाती है।

नियंत्रित वातावरण से बेहतर गुणवत्ता

सुमन मेहता के मुताबिक ग्रीन नेट हाउस में खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि पौधे तेज धूप, भारी बारिश और कीटों के प्रकोप से काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं। नियंत्रित वातावरण मिलने के कारण फूलों की गुणवत्ता अच्छी रहती है और उत्पादन भी लगातार बना रहता है।

हर सप्ताह 1500 फूलों का उत्पादन

फिलहाल उनके बागान से प्रति सप्ताह करीब 1500 जरबेरा फूलों का उत्पादन हो रहा है। स्थानीय माली और फूल विक्रेता सीधे खेत पर पहुंचकर इन फूलों की खरीदारी करते हैं। बाजार में एक जरबेरा फूल की कीमत 5 से 6 रुपये तक मिल जाती है, जिससे उन्हें नियमित आमदनी हो रही है। उन्होंने बताया कि गुलदस्ते, शादी-विवाह, समारोहों और सजावट के कार्यों में जरबेरा फूलों की मांग सबसे ज्यादा रहती है।

सरकारी योजना से मिला निशुल्क सेटअप

सुमन मेहता ने बताया कि इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा यह रहा कि जरबेरा के पौधे और ग्रीन नेट हाउस का पूरा सेटअप उद्यान विभाग की सरकारी योजना के तहत उन्हें निशुल्क उपलब्ध कराया गया। इसके चलते उन्हें शुरुआती निवेश नहीं करना पड़ा और अब उनकी आय का बड़ा हिस्सा सीधे मुनाफे के रूप में मिल रहा है।

दूसरे किसानों के लिए मिसाल

उनके बागान में लाल, पीले, गुलाबी, सफेद और नारंगी समेत कई आकर्षक रंगों के जरबेरा फूल खिले हुए हैं, जो दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेते हैं। सुमन मेहता की यह सफलता अब क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रही है और कई किसान आधुनिक फूलों की खेती की ओर रुचि दिखाने लगे हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप