UP Election 2027: 'माइक्रो मैनेजमेंट' और PDA फॉर्मूले पर टिका विपक्ष, क्या राहुल-अखिलेश दोहरा पाएंगे 2024 का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 57
2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में सत्ता वापसी की कोशिश में जुटा इंडिया ब्लॉक 2024 लोकसभा चुनाव वाले प्रदर्शन को दोहराना चाहता है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस आरक्षण, सेकुलर और PDA फॉर्मूले के साथ माइक्रो लेवल मैनेजमेंट पर फोकस कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। सत्ता में वापसी की राह तलाश रहा इंडिया ब्लॉक अपनी तैयारियों में पूरी ताकत झोंक रहा है। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस यानी प्रदेश के विपक्षी दल आरक्षण के मुद्दे को आगे रखते हुए माइक्रो लेवल मैनेजमेंट के जरिए चुनावी जमीन मजबूत करने में जुटे हैं। विपक्ष की कोशिश है कि सेकुलर और PDA वोट बैंक किसी भी सूरत में न बंटे, और इसी मकसद से उसके नेता ग्राउंड जीरो पर सक्रिय हैं।

2024 का प्रदर्शन दोहराने की कवायद

2024 के लोकसभा चुनाव में जिस अंदाज में विपक्षी दलों ने बीजेपी पर बढ़त बनाई थी, उसी रफ्तार को बरकरार रखने की पूरी मशक्कत इंडिया ब्लॉक कर रहा है। दरअसल, गठबंधन उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव वाले प्रदर्शन को एक बार फिर दोहराना चाहता है। यही वजह है कि 2024 की रणनीति को दोबारा मैदान में उतारने की तैयारी चल रही है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और राहुल गांधी दोनों ही 2027 में लोकसभा चुनाव जैसी कामयाबी हासिल करना चाहते हैं।

आरक्षण और माइक्रो मैनेजमेंट पर जोर

जिस तरह 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्ष आरक्षण के मुद्दे को वोटरों के बीच लेकर गया था, उसी मुद्दे के साथ वह एक बार फिर जनता के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। इसके साथ-साथ विपक्ष माइक्रो लेवल मैनेजमेंट पर भी काम कर रहा है। यानी जिस समाज के वोटर हैं, उसी समाज के नेता उनके बीच पहुंचकर उनकी नब्ज समझने की कोशिश कर रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर, उत्तर प्रदेश में 20 से 21 फीसदी दलित आबादी है और इस आबादी के भीतर भी सूक्ष्म स्तर पर प्रबंधन किया जा रहा है। जैसे जो पांच फीसदी पासी समाज है, उन मतदाताओं को साधने के लिए पासी समाज के ही नेता उनके पास भेजे जा रहे हैं।

सेकुलर वोट बैंक बचाने की रणनीति

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सामने एक बड़ी चिंता यह भी है कि मुस्लिम वोट बैंक एकजुट बना रहे। इसके लिए अलग से रणनीति तैयार की गई है। विपक्षी नेता लगातार इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि सेकुलर वोट बैंक कहीं और न खिसकने पाए।

AIMIM भी मैदान में सक्रिय

दूसरी ओर, मुस्लिम वोटों में सबसे ज्यादा सेंधमारी करने वाली पार्टी AIMIM के नेता भी ग्राउंड जीरो पर लगातार काम कर रहे हैं, जो किसी न किसी रूप में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के लिए सिरदर्द बना हुआ है। जब AIMIM के नेताओं से पूछा जाता है कि इस बार उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वोट बैंक किसकी ओर जा रहा है, तो वे खुलकर कुछ नहीं कहते। वे सिर्फ इतना कहते हैं कि यह वोट बीजेपी को नहीं जाएगा।

AIMIM नेता असीम वकार का कहना है कि पार्टी चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और मुस्लिम वोट बैंक बीजेपी की तरफ नहीं जाएगा। साथ ही पार्टी के नेता अखिलेश यादव को यह नसीहत भी दे रहे हैं कि गठबंधन की राजनीति के जरिए बीजेपी को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

बीजेपी का दावा

वहीं भाजपा के नेता दावा कर रहे हैं कि विपक्ष चाहे जितना भी माइक्रो लेवल मैनेजमेंट कर ले, सरकार तो योगी आदित्यनाथ की ही बनेगी। बीजेपी का कहना है कि प्रदेश की जनता उनके साथ है। गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी पिछले 9 सालों से प्रदेश की सत्ता से बाहर है और कांग्रेस पार्टी सपा के सहारे उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन तलाश रही है।

फिलहाल सभी दल अपनी-अपनी रणनीति बुनने में लगे हैं। बहरहाल, 2027 के विधानसभा चुनाव के नतीजे ही तय करेंगे कि किस पार्टी की रणनीति में कितना दम है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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