जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
भरतपुर के एक नौजवान की कहानी इन दिनों कई लोगों को नई राह दिखा रही है। यह दास्तान है रजत पूनिया की, जिन्होंने भीड़ में खो जाने के बजाय अपनी अलग पहचान गढ़ी और एक नए रास्ते पर आगे बढ़कर कामयाबी हासिल की। कभी छात्र राजनीति में सक्रिय रहने वाले रजत ने आज फूड ब्लॉगिंग की दुनिया में अपना खास मुकाम बना लिया है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर
रजत पूनिया के शुरुआती दिन छात्र राजनीति से जुड़े रहे। वह भरतपुर के एमएसजे कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे थे, लेकिन किन्हीं वजहों से चुनाव रद्द हो गए। इस घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने का मन बनाया और कुछ हटकर करने की ठान ली। यहीं से उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ।
फूड ब्लॉगिंग से बनाई नई पहचान
राजनीति से किनारा करने के बाद रजत का ध्यान अपने शहर भरतपुर की खूबियों पर गया। उन्हें यह बात महसूस हुई कि भरतपुर का स्थानीय खान-पान, पारंपरिक व्यंजन और यहां की अनदेखी विशेषताएं अब तक बड़े पैमाने पर लोगों तक नहीं पहुंच पाई हैं। इसी सोच को आधार बनाकर उन्होंने फूड ब्लॉगिंग की शुरुआत की।
रजत ने “टेस्ट सफारी” नाम से अपना चैनल शुरू किया, जिसके जरिए वह भरतपुर के अलग-अलग ठिकानों तक पहुंचकर वहां के मशहूर और पारंपरिक पकवानों को लोगों के सामने लाने लगे। शुरुआती दौर आसान नहीं था। सीमित संसाधनों और कम पहचान के बावजूद रजत ने लगातार मेहनत जारी रखी। उन्होंने अपने कंटेंट में सिर्फ खाने का जायका ही नहीं दिखाया, बल्कि उससे जुड़ी कहानियां, परंपराएं और स्थानीय संस्कृति को भी जगह दी। यही बात उनकी सबसे बड़ी खासियत बन गई।
भरतपुर के स्वाद को देशभर तक पहुंचाने का मिशन
रजत पूनिया ने बातचीत में बताया कि धीरे-धीरे लोगों को उनका अंदाज भाने लगा और उनका चैनल लोकप्रिय होता चला गया। आज वह भरतपुर के जाने-माने फूड ब्लॉगर बन चुके हैं। उनकी पहचान अब केवल जिले तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजस्थान और देश के दूसरे हिस्सों में भी लोग उनके काम को सराह रहे हैं। उनके वीडियो के माध्यम से लोग भरतपुर के प्रसिद्ध व्यंजनों और स्थानीय स्वाद से रूबरू हो रहे हैं। रजत मानते हैं कि हर शहर की अपनी अलग पहचान होती है और भरतपुर की पहचान उसके स्वाद और संस्कृति में बसी है।
सोच सही और मेहनत सच्ची तो सफलता तय
रजत अपने काम के जरिए न सिर्फ खान-पान को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि शहर की परंपराओं और स्थानीय कारोबार को भी आगे बढ़ाने में जुटे हैं। आज वह उन युवाओं के लिए मिसाल बन चुके हैं, जो अपने करियर को लेकर दुविधा में रहते हैं। उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि अगर सोच जुदा हो और मेहनत में सच्चाई हो, तो किसी भी क्षेत्र में कामयाबी हासिल की जा सकती है। भरतपुर का यह युवा अब अपने शहर की पहचान को देशभर तक पहुंचाने के मिशन में लगा हुआ है।
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