पशुपालन शुरू करना चाहते हैं? सरकार दे रही 80 हजार रुपए तक का अनुदान, समझिए पूरी योजना उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 30
गाय पालन के इच्छुक लोगों के लिए यूपी सरकार दो देसी नस्ल की गायों के पालन पर 40 प्रतिशत यानी करीब 80 हजार रुपए तक की सब्सिडी दे रही है। इसके लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन कर दस्तावेज़ों की जांच के बाद लाभ मिलेगा।

अगर आपको पशुओं को पालने का शौक है और आप गौ-पालन की दिशा में कदम बढ़ाना चाहते हैं, तो सरकार की एक योजना आपकी मदद कर सकती है। इसके तहत छोटी शुरुआत करके भी आप अपने घर पर पशुपालन का काम शुरू कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार दो गाय पालने के लिए पशुपालकों को अनुदान दे रही है। इसका लाभ लेने के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से आवेदन करना होगा और सभी दस्तावेज़ों की जांच पूरी होने के बाद ही पशुपालक को सब्सिडी दी जाएगी।

दो गाय पालने पर कितनी मिलेगी सब्सिडी

फिरोजाबाद के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुमेश चंद्र गुप्ता के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार पशुपालकों के लिए अलग-अलग तरह की योजनाएं चलाती रहती है। इसी कड़ी में इस बार दो गाय पालने के लिए अच्छा अनुदान दिया जा रहा है। जो पशुपालक अपने घर पर देसी नस्ल की गायों का पालन करेंगे, उन्हें 40% तक की सब्सिडी मिलेगी। इसके लिए पशुपालकों को ऑनलाइन माध्यम से या फिर पशुपालन विभाग में जाकर आवेदन करना होगा, और आवेदन के बाद कागजों की जांच होने पर ही लाभ दिया जाएगा।

अधिकारी ने बताया कि दो गाय पालने पर पशुपालकों को 2 लाख रुपए खर्च करने होंगे, जिसमें गायों के रख-रखाव से लेकर सभी प्रकार की व्यवस्थाएं शामिल हैं। इन सभी खर्चों का बिल विभाग में जमा करने के बाद ही पशुपालकों को लगभग 80000 रुपए की सब्सिडी प्राप्त होगी।

इन देसी नस्ल की गायों का करें पालन

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने सलाह दी कि योजना का लाभ लेने के इच्छुक पशुपालक सबसे पहले आवेदन करें और उसके बाद गायों के रखरखाव के लिए ज़रूरी व्यवस्था तैयार करें। इस योजना में पशुपालकों को साहीवाल, थारपारकर और हरियाणवी जैसी देसी नस्ल की गायों का पालन करना होगा। आवेदन प्राप्त होने के बाद विभागीय नियमों के अनुसार पशुपालकों को लाभ दिया जाएगा।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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