राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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भारत ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर के क्षेत्र में एक बड़ी छलांग लगाते हुए 449 करोड़ रुपए की लागत से 'ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम' (GNSS) जैमर्स तैयार कर लिए हैं। इस गुप्त हथियार को युद्ध की रणनीति बदल देने वाला यानी गेमचेंजर माना जा रहा है।
कैसे काम करता है यह सीक्रेट हथियार
यह स्वदेशी प्रणाली 'स्पूफिंग तकनीक' के आधार पर काम करती है। दुश्मन के ड्रोन और मिसाइलों को सीधे जाम करने के बजाय यह उनके कंप्यूटर सिस्टम में गलत रास्ता और झूठी लोकेशन भर देती है। नतीजतन दुश्मन के घातक हथियार अपने लक्ष्य से भटककर बूमरैंग की तरह वापस मुड़ते हैं और उन्हीं के अपने ठिकानों पर जा गिरते हैं।
चीन और अमेरिका की प्रणाली को एक साथ अंधा करने की ताकत
इस स्वदेशी ब्रह्मास्त्र की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह एक ही समय में चीन के 'बायडू' (BeiDou) और अमेरिकी जीपीएस दोनों को निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि इसे चीन और पाकिस्तान की हर तकनीकी जुगत को नाकाम करने वाला हथियार बताया जा रहा है।
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