महोबा: बेटे और पत्नी को खोने का गम न सह सका पिता, 11 दिन बाद दोनों की कब्र से लिपटकर तोड़ा दम उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 3
महोबा के चरखारी में हीटवेव ने पहले 6 साल के बेटे और फिर सदमे में मां की जान ले ली। ठीक 11 दिन बाद पिता सुब्हान अहमद ने भी कब्रिस्तान में दोनों की कब्र से लिपटकर प्राण त्याग दिए, जिससे तीन मासूम बच्चे अनाथ हो गए।

उत्तर प्रदेश के महोबा से मोहब्बत, सदमे और मौत की एक ऐसी दर्दनाक कहानी सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। एक पिता अपनी पत्नी और मासूम बेटे की मौत का दुख सह नहीं सका और ठीक 11 दिन बाद उसी कब्रिस्तान में दोनों की कब्रों से लिपटकर उसने भी हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं। इस त्रासदी ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया और तीन मासूम बच्चों के सिर से मां-बाप दोनों का साया छीन लिया।

हीटवेव ने एक झटके में उजाड़ दीं दो जिंदगियां

यह मामला महोबा जिले के चरखारी कस्बे का है। मूल रूप से मध्य प्रदेश के हरपालपुर के रहने वाले 40 वर्षीय सुब्हान अहमद इन दिनों चरखारी स्थित अपनी ससुराल मोहल्ला बैरूगंज में आए हुए थे। बीती 25 मई को भीषण गर्मी और लू ने इस परिवार पर पहला वार किया। सुब्हान के 6 साल के बेटे हसनैन की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उसे इलाज के लिए तुरंत छतरपुर रेफर कर दिया गया।

मां रजिया खातून अपने लाडले को गोद में लेकर अस्पताल की ओर दौड़ीं, लेकिन रास्ते में ही मासूम हसनैन ने दम तोड़ दिया। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर पाईं और अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी भी मृत्यु हो गई। महज 11 दिन पहले जब चरखारी में एक साथ मां और बेटे के दो जनाजे उठे, तो पूरा कस्बा रो पड़ा था।

पत्नी और बच्चे की जुदाई में घुटता रहा सुब्हान

इस दोहरे झटके ने सुब्हान अहमद को अंदर से पूरी तरह तोड़ दिया था। वह अपनी पत्नी और सबसे छोटे बेटे हसनैन से बेहद प्यार करते थे। परिजनों के मुताबिक, वह अपने बच्चों का इतना ख्याल रखते थे कि हल्की सी खांसी आने पर भी तुरंत डॉक्टर के पास भागते थे। पत्नी और बेटे के अचानक चले जाने के बाद वह दिन-रात उन्हीं की याद में तड़पते रहते थे और इस सच्चाई को स्वीकार ही नहीं कर पा रहे थे कि उनकी दुनिया उजड़ चुकी है।

कब्रिस्तान का वह मंजर, जिसने सबकी रूह कंपा दी

शुक्रवार की सुबह करीब 4 बजे सुब्हान हर रोज की तरह पत्नी और बेटे की याद में कब्रिस्तान फातिहा पढ़ने के लिए घर से निकले। दो घंटे बीत जाने के बाद भी जब वह वापस नहीं लौटे, तो परिजन चिंतित हो उठे। सुब्हान के साले मोहम्मद सलीम और हलीम मोहम्मद अन्य रिश्तेदारों के साथ उन्हें ढूंढते हुए कब्रिस्तान पहुंचे।

वहां उन्होंने जो दृश्य देखा, उसने सबकी रूह कंपा दी। सुब्हान दोनों कब्रों के बीच सजदे की हालत में अचेत पड़े थे। उनका एक हाथ बेटे हसनैन की कब्र पर और दूसरा हाथ पत्नी रजिया की कब्र पर रखा था। परिजनों ने उन्हें हिलाया-डुलाया, लेकिन शरीर में कोई हलचल नहीं थी। कब्रों से लिपटी हालत में उन्हें मृत पाकर परिवार में कोहराम मच गया।

जहरीले कीड़े का डंक या टूटा हुआ दिल?

परिजन तुरंत सुब्हान को लेकर स्थानीय अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें देखते ही मृत घोषित कर दिया। उनकी मौत की वजह को लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है। परिजनों के अनुसार, सुब्हान के पैर पर एक अजीब सा निशान मिला है, जिसे डॉक्टरों ने भी देखा।

आशंका जताई जा रही है कि रात के अंधेरे या सुबह तड़के कब्र से लिपटकर रोते समय किसी जहरीले कीड़े या सांप ने उन्हें काट लिया हो। वहीं एक चर्चा यह भी है कि गहरे सदमे और टूटे दिल के कारण उन्हें दिल का दौरा पड़ा हो। मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।

पीछे छूट गए तीन अनाथ बच्चे, रो रहा पूरा इलाका

11 दिनों के भीतर एक ही परिवार में तीन मौतें हो जाने से पूरा महोबा और हरपालपुर इलाका गहरे सदमे में है। इस त्रासदी का सबसे दुखद पहलू यह है कि सुब्हान के पीछे तीन मासूम बच्चे बेसहारा रह गए हैं। इनमें 17 साल का बेटा सैफ, 14 साल की बेटी रोशनी और 11 साल की छोटी बेटी आलिया शामिल हैं।

इन बच्चों के सिर से मां और बाप दोनों का साया हमेशा के लिए उठ चुका है और घर में अब कोई कमाने या उनका ख्याल रखने वाला नहीं बचा है। सुब्हान के रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों ने रोते हुए प्रशासन और सरकार से गुहार लगाई है कि इन अनाथ बच्चों के भविष्य, पढ़ाई-लिखाई और भरण-पोषण के लिए आर्थिक मदद की जाए, ताकि इनका जीवन बर्बाद होने से बचाया जा सके।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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