खेत में अकेली नहीं रहतीं जबा, हर कदम पर साथ चलते हैं उनके मुर्गे, दिल जीतती यह कहानी मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 3
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले की एक गृहिणी जबा चोरे ने अपने मुर्गा-मुर्गियों को परिवार के सदस्य की तरह पाला है, और वे हर जगह उनके साथ-साथ चलते हैं। घर में मांसाहार पूरी तरह वर्जित होने के बावजूद उनका यह लगाव सबका दिल जीत रहा है।

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के एक छोटे से गांव से सामने आई एक कहानी इन दिनों हर किसी का दिल छू रही है। यहां रहने वाली गृहिणी जबा चोरे ने अपने मुर्गा-मुर्गियों को केवल पालने के लिए नहीं, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों की तरह अपनाया है। हैरानी की बात यह है कि उनके घर में कोई भी नॉनवेज नहीं खाता, इसके बावजूद इन पक्षियों के प्रति उनका स्नेह और जुड़ाव देखते ही बनता है।

एक आवाज और दौड़े चले आते हैं पंख वाले बच्चे

जबा चोरे का यह अनूठा रिश्ता पूरे गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। वह जैसे ही अपने मुर्गा-मुर्गियों को आवाज लगाती हैं, सभी तुरंत दौड़ते हुए उनके पास पहुंच जाते हैं। सुबह हो या शाम, घर हो या खेत—हर जगह ये पक्षी उनके साथ ही दिखाई देते हैं। गांव के लोग इस अनोखे लगाव को देखकर अचंभित रह जाते हैं।

खतरे से आगाह करते हैं देसी मुर्गे

दरअसल, जबा अपने परिवार के साथ गांव से दूर खेत में रहती हैं, जहां अक्सर सांपों का खतरा बना रहता है। ऐसे में उनके पाले गए देसी मुर्गे-मुर्गियां सिर्फ साथी ही नहीं, बल्कि सुरक्षा का भी काम करते हैं। जब भी आसपास कोई सांप या खतरा होता है, ये जोर-जोर से आवाज करने लगते हैं और कई बार सांपों को घर में घुसने से भी रोक देते हैं। इस तरह जबा को समय रहते खतरे का अंदाजा हो जाता है।

बचपन से बच्चों की तरह पाला

जबा बताती हैं कि उन्होंने इन पक्षियों को बचपन से अपने बच्चों की तरह पाला है। अपने ही हाथों से दाना-पानी देती रहीं और हमेशा इन्हें परिवार का हिस्सा माना। शायद यही कारण है कि आज ये मुर्गा-मुर्गियां भी उनके साथ उतना ही गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं। जबा जहां भी जाती हैं, ये उनके आगे-पीछे चलते हैं और यदि वह अचानक घर लौट आएं तो ये भी फौरन उनके पीछे-पीछे वापस लौट आते हैं।

इंसान और पक्षियों के बीच गहरा रिश्ता

यह नजारा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता। इंसान और पक्षियों के बीच ऐसा गहरा रिश्ता बहुत कम देखने को मिलता है। जबा का कहना है कि वह पशु-पक्षियों से बेहद प्रेम करती हैं और इसी वजह से उन्होंने इन्हें पालने का निर्णय लिया, न कि किसी व्यवसाय या भोजन के मकसद से।

सबसे खास बात यह है कि उन्होंने मुर्गा-मुर्गियों को केवल शौक और लगाव से पाला है, जबकि उनके घर में मांसाहार पूरी तरह वर्जित है। इसके बावजूद उनका यह प्रयास यह संदेश देता है कि प्यार और अपनापन किसी प्रजाति का मोहताज नहीं होता। खंडवा की जबा चोरे की यह कहानी सिखाती है कि इंसान और प्रकृति के बीच अगर सच्चा जुड़ाव हो, तो हर रिश्ता खास बन जाता है—चाहे वह इंसानों के बीच हो या फिर पक्षियों के साथ।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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