बॉन्ड बाजार में लौटे विदेशी निवेशक, जून में डाले करीब ₹17,000 करोड़; 16 महीने का सबसे बड़ा निवेश बाज़ार 2 महीने पहले 93
लंबे इंतजार के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों ने जून में भारतीय सरकारी बॉन्ड्स में करीब 17,000 करोड़ रुपये लगाए, जो पिछले 16 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश है। टैक्स में राहत और वैश्विक हालात में सुधार को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।

लंबे समय तक दूरी बनाए रखने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारतीय बॉन्ड बाजार में वापसी ने वित्तीय बाजारों में नई उम्मीद जगा दी है। जून महीने में इन निवेशकों ने भारतीय सरकारी बॉन्ड्स में जमकर खरीदारी की और महज कुछ कारोबारी दिनों में ही करीब 17,000 करोड़ रुपये झोंक दिए। सरकार की ओर से टैक्स में दी गई बड़ी राहत और वैश्विक परिस्थितियों में आए सुधार के चलते भारत एक बार फिर विदेशी निवेशकों की पसंदीदा जगह बनता दिख रहा है।

जून 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड बाजार में करीब 1.84 अरब डॉलर (लगभग 17,000 करोड़ रुपये) लगाए हैं। इसे पिछले 16 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश माना जा रहा है। इससे पहले मार्च 2025 में विदेशी निवेशकों ने करीब 3.69 अरब डॉलर डाले थे। खास बात यह है कि पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में विदेशी निवेशकों ने सिर्फ 2.07 अरब डॉलर के बॉन्ड खरीदे थे, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष के पहले दो महीनों अप्रैल और मई में यह आंकड़ा महज 130 मिलियन डॉलर रहा था।

सरकार के एक फैसले ने पलट दी तस्वीर

विदेशी निवेशकों की इस वापसी के पीछे सबसे अहम वजह केंद्र सरकार का हालिया फैसला बताया जा रहा है। सरकार ने 6 जून को सरकारी बॉन्ड्स में विदेशी निवेश पर लगने वाले लॉन्ग टर्म और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स को समाप्त कर दिया। साथ ही ब्याज आय पर लगने वाले विदहोल्डिंग टैक्स को भी हटा दिया गया। पहले विदेशी निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर 12.5 फीसदी, शॉर्ट टर्म गेन पर 30 फीसदी और ब्याज आय पर करीब 20 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता था। इन करों के हटते ही भारतीय बॉन्ड्स का आकर्षण कई गुना बढ़ गया है।

रुपये और बॉन्ड यील्ड को मिला सहारा

बढ़ते विदेशी निवेश का असर भारतीय मुद्रा और बॉन्ड बाजार दोनों पर साफ नजर आया है। जून महीने में रुपया डॉलर के मुकाबले करीब 1 फीसदी मजबूत हुआ है। वहीं, 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड 7 फीसदी से घटकर 6.87 फीसदी पर आ गई है। इससे सरकार के लिए कर्ज जुटाने की लागत घटेगी और वित्तीय स्थिरता को भी मजबूती मिलेगी।

आगे और बड़ा विदेशी पैसा आने की उम्मीद

बाजार के जानकारों का अनुमान है कि टैक्स छूट और दूसरे सुधारों के दम पर अगले दो वर्षों में भारतीय बॉन्ड बाजार में 45 से 50 अरब डॉलर तक का विदेशी निवेश आ सकता है। रिजर्व बैंक ने भी FAR के तहत अधिक सरकारी प्रतिभूतियों को शामिल कर निवेशकों के लिए रास्ता और आसान बना दिया है।

मनीष अग्रवाल पाबना के मार्केट्स संवाददाता हैं और शेयर बाजार, आईपीओ तथा निवेश के रुझानों पर रिपोर्टिंग करते हैं। सेंसेक्स-निफ्टी की चाल, कंपनियों के नतीजों और निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी को वे सहज भाषा में समझाते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि छोटे निवेशक भी बाजार को बेहतर समझ सकें।

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