उत्तर प्रदेश
2 घंटे पहले
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उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में सड़कों पर चलना मुश्किल होता जा रहा है। प्रदेश सरकार के गड्ढा मुक्त अभियान के दावों के बीच कस्ता विधानसभा क्षेत्र की जमीनी तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। नगरा से जैतापुर समेत कई गांवों को आपस में जोड़ने वाली सड़क पिछले कई वर्षों से जर्जर हालत में पड़ी है। जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढों के चलते राहगीरों और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। बरसात के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है, जब गड्ढों में पानी भर जाने से रास्ता पहचानना तक मुश्किल हो जाता है।
सालों से जर्जर पड़ी है मंडी समिति की बनाई सड़क
मंडी समिति द्वारा बनाई गई यह सड़क करीब छह वर्ष से जर्जर अवस्था में है। वर्ष 2005 में इसका निर्माण कार्य कराया गया था, लेकिन समय के साथ इसकी हालत पूरी तरह खराब हो गई। सड़क पर बने गहरे गड्ढे लगातार दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बरसात के दिनों में हालात और भी बिगड़ जाते हैं, जिससे आवागमन बेहद कठिन हो जाता है।
सड़क के निर्माण और मरम्मत को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सड़क की बदहाली के कारण आसपास के गांवों के लोगों को रोजाना जोखिम उठाते हुए सफर करना पड़ता है।
दो विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ती है यह सड़क
स्थानीय निवासी अमित वर्मा बताते हैं कि वर्ष 2005 में मंडी समिति की ओर से इस सड़क का निर्माण कराया गया था, लेकिन अब छह वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। उनका कहना है कि मरम्मत के लिए कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया, मगर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
अमित वर्मा के अनुसार खास बात यह है कि यह सड़क दो विधानसभा क्षेत्रों—श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र और कस्ता विधानसभा क्षेत्र—को आपस में जोड़ती है, फिर भी दोनों विधायक इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह सड़क 20 से 25 गांवों से होकर गुजरती है।
पैदल चलना भी हुआ मुश्किल
जैतापुर गांव के निवासी शिव सिंह ने बताया कि सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढे हैं कि पैदल निकलना तक मुश्किल हो गया है। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
शिव सिंह का कहना है कि सरकार की ओर से किए जा रहे दावे सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं। बरसात के मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि क्षेत्रीय विधायक सौरभ सिंह सोनू से भी कई बार इस बारे में कहा गया, लेकिन उन्होंने भी कोई ध्यान नहीं दिया।
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