छत्तीसगढ़
2 घंटे पहले
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छत्तीसगढ़ का मैनपाट कभी अपनी ठंडी जलवायु और मनोरम प्राकृतिक सुंदरता के लिए पहचाना जाता था, पर अब यह इलाका भी बढ़ती गर्मी की मार झेल रहा है। सरगुजा संभाग मुख्यालय से महज 45 किलोमीटर की दूरी पर बसे इस स्थान पर अब गर्मी का सितम साफ महसूस किया जा रहा है। राहत पाने के लिए स्थानीय लोग एसी, कूलर और पंखों का सहारा लेने लगे हैं।
कभी गर्मी में भी होता था ठंड का अहसास
करीब दस साल पहले के मैनपाट की बात करें तो यह जगह अपनी खूबसूरती और ठंडे वातावरण के लिए मशहूर थी। तपती गर्मी के मौसम में भी यहां लोगों को ठंडक का अनुभव होता था। यही वजह थी कि गर्मियों की छुट्टियों और वीकेंड पर बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते थे। लेकिन अब हालात इतने बदल चुके हैं कि लोग अपने घरों में एसी तक लगवाने लगे हैं।
पहले बिना पंखे-कूलर के कटती थीं गर्मियां
स्थानीय निवासी धर्मपाल ने बताया कि मैनपाट को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है और यहां सालभर पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती है। उनके मुताबिक पहले यहां का वातावरण बेहद सुहावना और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर था, जहां गर्मियों में भी पंखे, कूलर या एसी की जरूरत महसूस नहीं होती थी। मगर अब स्थिति पूरी तरह पलट चुकी है।
दस साल में बढ़ गया तापमान
धर्मपाल के अनुसार बीते कुछ वर्षों में मैनपाट का तापमान लगातार ऊपर चढ़ा है। इस साल गर्मी के दौरान यहां पारा करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। जहां पहले लोग बिना किसी इलेक्ट्रॉनिक कूलिंग उपकरण के आराम से रहते थे, वहीं अब कूलर और एसी का इस्तेमाल आम बात हो गई है। उनका कहना है कि पहले कूलर-पंखे का उपयोग न के बराबर होता था, जबकि अब इनके बिना रह पाना कठिन हो गया है।
पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर असर
बढ़ती गर्मी का प्रभाव मैनपाट के पर्यटन व्यवसाय पर भी दिखने लगा है। धर्मपाल ने बताया कि पहले गर्मियों में बड़ी तादाद में पर्यटक यहां घूमने आते थे, लेकिन इस बार अत्यधिक गर्मी के चलते उनकी संख्या घट गई है। इसका सीधा असर स्थानीय व्यवसायियों पर पड़ा है, जिन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और एक-एक पैसे के लिए जूझना पड़ रहा है।
पेड़ों की कटाई को माना जा रहा बड़ी वजह
धर्मपाल का मानना है कि क्षेत्र में लगातार हो रही पेड़ों की कटाई ही मैनपाट के बढ़ते तापमान की प्रमुख वजह है। उन्होंने आगाह किया कि अगर वन क्षेत्र इसी तरह सिमटता गया तो आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं। उनके अनुसार पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के बिना मैनपाट की प्राकृतिक पहचान को बचा पाना मुश्किल होगा।
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