उत्तर प्रदेश
4 दिन पहले
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कटहल तो आपने कई बार खाया होगा और आमतौर पर इसका वजन 2 से 5 किलो तक रहता है। लेकिन उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के एक किसान अपनी खास तकनीक से ऐसे कटहल तैयार कर रहे हैं, जिनका वजन 50 किलो से लेकर पूरे 1 क्विंटल (100 किलो) तक पहुंच जाता है। इतने भारी होने के बावजूद इस कटहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अंदर से पकता नहीं, बल्कि एकदम कच्चा रहता है और सब्जी बनाने के लिए बिल्कुल उपयुक्त साबित होता है।
परंपरागत खेती छोड़कर प्राकृतिक तरीके की ओर रुझान
मुरादाबाद जिले में इन दिनों किसान पारंपरिक खेती से हटकर प्राकृतिक और आधुनिक तरीकों को तेजी से अपना रहे हैं। इसी कड़ी में यहां के एक प्रगतिशील किसान कटहल की खेती से हर साल बंपर मुनाफा कमा रहे हैं। उनके बाग में छोटे आकार से लेकर बड़े आकार तक के कटहल पेड़ों पर लदे रहते हैं, मगर उनकी असली पहचान वे 50 किलो से एक क्विंटल तक के विशालकाय कटहल हैं, जिन्हें वे बाजार में बेचते हैं। इस अनोखे और भारी-भरकम कटहल को खरीदने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंच रहे हैं।
परदादा के जमाने से चली आ रही खेती, बाग में 25 पेड़
किसान चंद्र प्रकाश सिंह बताते हैं कि यह कोई नया काम नहीं है, बल्कि उनके परिवार में यह खेती पीढ़ियों से होती आ रही है। उनके दादा और परदादा के दौर से ही इस खास किस्म के कटहल की खेती की जाती रही है, जिसे अब वे आगे बढ़ा रहे हैं। फिलहाल उनके बाग में कटहल के कुल 25 पेड़ हैं। इन सभी 25 पेड़ों पर हर सीजन में भारी संख्या में कटहल आते हैं, जिनसे उन्हें हर साल अच्छी आमदनी होती है।
एक क्विंटल का होने के बाद भी अंदर से रहता है कच्चा
इस कटहल की खासियत इसके वजन और स्वाद दोनों में छिपी है। चंद्र प्रकाश के मुताबिक, बड़े आकार के फल अक्सर पक जाते हैं, मगर उनके बाग का कटहल 50 किलो से 1 क्विंटल का होने के बाद भी बिल्कुल नहीं पकता। यह अंदर से पूरी तरह कच्चा और कड़ा रहता है, जिससे यह सब्जी बनाने या अचार डालने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। इसी वजह से बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है।
लागत न के बराबर, पूरी कमाई शुद्ध मुनाफा
खेती के तरीके पर बात करते हुए किसान ने बताया कि वे इस कटहल को उगाने में किसी भी प्रकार के केमिकल, यूरिया या कीटनाशक दवा का इस्तेमाल नहीं करते। यह पूरी तरह सौ प्रतिशत प्राकृतिक और जैविक खेती है। पेड़ों के पोषण के लिए वे सिर्फ देसी गोबर की खाद का उपयोग करते हैं। प्राकृतिक तरीके से उगाने के कारण इस खेती में लागत लगभग जीरो आती है और जो भी आमदनी होती है, वह पूरी तरह शुद्ध मुनाफा होती है।
लोकल बाजार से बड़ी मंडियों तक भारी मांग
चंद्र प्रकाश इन विशालकाय कटहलों को अपने इलाके के स्थानीय बाजारों के साथ-साथ बड़ी मंडियों में भी सप्लाई करते हैं। मंडी में थोक भाव अच्छे मिलने के कारण उन्हें इस खेती से शानदार बचत हो रही है। कम मेहनत, बिना लागत और पीढ़ियों पुराने इस प्राकृतिक तरीके को अपनाकर वे आज के दौर में भी खेती से बेहतरीन मुनाफा कमा रहे हैं और दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं।
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