फरीदाबाद में नोटिसों का खौफ: 'ईंट के नीचे दबाकर रख गए कागज', 2000 परिवार पूछ रहे- 'हमारा कसूर क्या?' हरियाणा 3 घंटे पहले 12
फरीदाबाद की जीवन नगर पार्ट-2 और आसपास की कॉलोनियों में घरों पर चस्पा कारण बताओ नोटिसों ने हजारों परिवारों की नींद उड़ा दी है। जिंदगी भर की कमाई से बने आशियानों के छिनने का डर लोगों को सता रहा है।

फरीदाबाद की नेहरू कॉलोनी में हुई तोड़फोड़ का दर्द लोगों के दिलों से अभी पूरी तरह उतरा भी नहीं था कि अब जीवन नगर पार्ट-2 और इसके आसपास की कई कॉलोनियों में हजारों परिवारों के सिर पर बेघर होने का खतरा मंडराने लगा है। वर्षों की मेहनत, बच्चों के सपने और एक-एक पैसा जोड़कर खड़े किए गए आशियाने अब नोटिसों के साये में आ गए हैं। घरों के बाहर चिपके कागजों ने लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन दोनों छीन लिया है।

क्यों जारी हुए नोटिस

जिला नगर योजनाकार (प्रवर्तन) विभाग ने हरियाणा शहरी क्षेत्र अधिनियम 1975 के तहत 55 लोगों को कारण बताओ नोटिस थमाए हैं। आरोप है कि बिना लाइसेंस कृषि भूमि पर अवैध कॉलोनियां विकसित कर प्लॉट काटे गए और निर्माण कराया गया। विभाग ने एक सप्ताह के भीतर जरूरी दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि तीन हजार से ज्यादा मकानों पर कार्रवाई की तैयारी है और 10 से अधिक कॉलोनियों में नोटिस दिए गए हैं।

'ईंट के नीचे दबा गए नोटिस'

स्थानीय निवासी देवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि वह पिछले तीन साल से जीवन नगर पार्ट-2 में रह रहे हैं और उनके घर पर भी नोटिस चिपका दिया गया है। उनके मुताबिक करीब दो हजार घरों पर नोटिस लगाए गए हैं और जिन घरों में कोई नहीं रहता, वहां भी ईंट के नीचे दबाकर कागज रख दिए गए।

देवेंद्र मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और एक कंपनी में नौकरी करते हैं। उनका कहना है कि करीब 15 हजार रुपये की सैलरी में परिवार चलाते हैं और एक-एक पैसा जोड़कर लगभग आठ लाख रुपये लगाकर यह घर बनाया था।

'प्रॉपर्टी डीलर ने भरोसा दिलाया था'

आठ साल से यहां रह रहे मनोज कुमार बताते हैं कि जब अधिकारी नोटिस देने आए तब वह ड्यूटी पर थे, इसलिए कागज ईंट के नीचे दबाकर रख दिया गया। उनके अनुसार सिर्फ प्लॉट खरीदने में ही 10 लाख रुपये खर्च हो गए थे।

मनोज का कहना है कि प्रॉपर्टी डीलर ने भरोसा दिलाया था कि कॉलोनी पास है, रजिस्ट्री भी कराई गई और नक्शा तक दिखाया गया। अब अचानक नोटिस आने से पूरा परिवार परेशान है, जबकि फोन करने पर डीलर अब भी कह रहा है कि कोई दिक्कत नहीं होगी।

एक अन्य निवासी सुभाष बताते हैं कि तीन दिन पहले अधिकारी सीधे घर आकर नोटिस दे गए। वह ड्यूटी से लौटकर सो रहे थे और अधिकारी गेट के नीचे से कागज डालकर चले गए। नींद खुलने पर नोटिस देखकर वह हैरान रह गए। कंपनी में नौकरी करने वाले सुभाष को हरियाणा ग्रेड की सैलरी मिलती है और उन्होंने करीब 12 लाख रुपये लगाकर यह मकान बनाया था।

सिर्फ प्लॉट, फिर भी नोटिस

राजू सोनी का कहना है कि उन्हें यहां रहते हुए 20 साल हो चुके हैं। जीवन नगर पार्ट-2 में उनका सिर्फ खाली प्लॉट है, मकान नहीं बना है, फिर भी उन्हें नोटिस मिला है। उनके मुताबिक नोटिस में उन लोगों के नाम दर्ज हैं जिन्होंने प्लॉट काटे थे, और अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे क्या होगा।

दिनभर चर्चा, दस्तावेज खंगालते रहे लोग

नोटिस लगने के बाद कॉलोनियों में दिनभर इसी मुद्दे की चर्चा होती रही। लोग अपने दस्तावेज खंगालते और कानूनी सलाह लेते नजर आए। जिन परिवारों ने जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर अपने सपनों का घर खड़ा किया, उनके सामने अब सबसे बड़ी चिंता यही है कि कहीं उनका आशियाना उनसे छिन न जाए।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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