72 किलो से 49 किलो तक का सफर: इन 8 छोटी आदतों में बदलाव कर महिला ने घटाया 23 किलो वजन जीवनशैली एक घंटा पहले 3
फिटनेस ट्रेनर शिखा सुराना ने अपनी जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव कर अपना वजन 72 किलो से घटाकर 49 किलो किया है। बिना किसी क्रैश डाइट के उन्होंने अपनी किन आदतों को बदला, आइए जानते हैं।

आदतों में बदलाव से मिला फिटनेस का लक्ष्य

वजन कम करने के लिए अक्सर लोग जिम, डाइटिंग या फास्टिंग का सहारा लेते हैं, लेकिन असली बदलाव जीवनशैली में सुधार करने से आता है। फिटनेस ट्रेनर शिखा सुराना ने सोशल मीडिया पर अपनी वेट लॉस यात्रा साझा की है, जहाँ उन्होंने बताया कि कैसे अपनी गलत आदतों को छोड़कर उन्होंने 23 किलो वजन कम किया। उनका वजन पहले 72 किलो था, जो अब घटकर 49 किलो हो गया है। उन्होंने इसके लिए कोई शॉर्टकट नहीं बल्कि अनुशासन को अपनाया।

इन 8 आदतों को सुधारना है जरूरी

शिखा ने अपनी दिनचर्या में शामिल उन खास सुधारों के बारे में बताया है जो लंबे समय तक वजन नियंत्रित रखने में मदद करते हैं:

  • नाश्ता न छोड़ें: पहले शिखा सुबह खुद को भूखा रखती थीं, जिससे मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता था। अब वे सुबह उठने के एक घंटे के भीतर भोजन करना शुरू कर देती हैं।
  • कैलोरी वाली ड्रिंक्स से दूरी: चीनी वाली चाय, जूस और कोल्ड कॉफी को छोड़कर उन्होंने सादा पानी, ब्लैक कॉफी और सादी चाय को अपनी डाइट में शामिल किया है।
  • स्वस्थ भोजन की मात्रा पर नियंत्रण: मखाना या मेवे जैसे हेल्दी विकल्प भी अधिक मात्रा में लेने से वजन बढ़ाते हैं। उन्होंने हेल्दी चीजों की सही मात्रा लेना शुरू किया है।
  • वेट ट्रेनिंग की अहमियत: केवल कार्डियो के बजाय वेट लिफ्टिंग शुरू करने से उनके शरीर में सकारात्मक बदलाव आने शुरू हुए।
  • नींद और तनाव प्रबंधन: देर रात जागने से तनाव और कोर्टिसोल बढ़ता है। अब वे हर दिन 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लेती हैं।
  • घर का बना खाना: बाहर के खाने में छिपी हुई कैलोरी से बचने के लिए उन्होंने घर के खाने को प्राथमिकता दी है।
  • सीमित मात्रा में खाएं: एक बार में पेट भरकर खाने के बजाय, उन्होंने संयमित भोजन की आदत डाली है ताकि शरीर पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
  • सकारात्मक दृष्टिकोण: वजन घटाना एक निरंतर प्रक्रिया है। उन्होंने खुद को हर दिन अनुशासित और सकारात्मक बनाए रखने पर जोर दिया है।

शिखा का अनुभव यह दर्शाता है कि वजन घटाने के लिए किसी क्रैश डाइट की नहीं, बल्कि जीवनशैली में निरंतर बदलाव और अनुशासन की आवश्यकता होती है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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