टॉम अल्टर: राजेश खन्ना की फिल्म देख जगी अभिनय की चाहत, धर्मेंद्र की फिल्म से मिली पहली पहचान मनोरंजन एक महीने पहले 55
हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार टॉम अल्टर का जन्म 22 जून 1950 को हुआ था। अभिनय के प्रति उनका जुनून राजेश खन्ना की फिल्म 'आराधना' को देखकर जागा था, जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

अभिनय की शुरुआत और संघर्ष

हिंदी सिनेमा और थिएटर की दुनिया में टॉम अल्टर एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने अपनी कला और व्यक्तित्व से एक खास जगह बनाई। 22 जून 1950 को मसूरी में जन्मे टॉम अल्टर का परिवार मूल रूप से अमेरिका से था। उनके दादा-दादी 1916 में भारत आए थे। फिल्म आराधना देखने के बाद टॉम अल्टर के भीतर अभिनय का गहरा जुनून पैदा हुआ। राजेश खन्ना की इस फिल्म से प्रेरित होकर उन्होंने पुणे के एफटीआईआई में दाखिला लिया और 1974 में गोल्ड मेडल के साथ अपनी पढ़ाई पूरी की।

फिल्मों में यादगार भूमिकाएं

मुंबई आने के बाद अपनी गोरी रंगत के कारण उन्हें अक्सर विदेशी अफसर या खलनायक के रोल मिलते थे, लेकिन अपनी जबरदस्त हिंदी और उर्दू संवाद अदायगी से उन्होंने हर किरदार को यादगार बना दिया। उन्हें असली पहचान देव आनंद की फिल्म साहेब बहादुर से मिली, हालांकि इससे पहले वह धर्मेंद्र की फिल्म चरस में मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी की भूमिका में नजर आ चुके थे। उन्होंने सत्यजीत रे की शतरंज के खिलाड़ी, क्रांति, गांधी, परिंदा और राम तेरी गंगा मैली जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में अपने अभिनय की छाप छोड़ी।

खेल पत्रकारिता और सचिन तेंदुलकर

अभिनय के अलावा टॉम अल्टर को खेलों से विशेष लगाव था। 1983 में भारत की विश्व कप जीत के बाद उन्होंने सुनील गावस्कर की टीम के साथ अमेरिका में प्रदर्शनी मैच खेला था। खेल पत्रकारिता में भी उनका नाम एक ऐतिहासिक उपलब्धि के साथ जुड़ा है। 19 जनवरी 1989 को उन्होंने मुंबई के सीसीआई नेट्स पर 15 साल के सचिन तेंदुलकर का पहला टीवी इंटरव्यू लिया था।

टेलीविजन और अंतिम सफर

टॉम अल्टर ने केवल फिल्मों में ही नहीं, बल्कि छोटे पर्दे पर भी दर्शकों का दिल जीता। उन्होंने आशिकी फिल्म में राहुल रॉय के साथ काम करते हुए एक सख्त हॉस्टल वॉर्डन की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा जबान संभाल के, जुनून और शक्तिमान में उनके अभिनय को घर-घर में सराहा गया। साल 2016 में उन्हें त्वचा के एक दुर्लभ कैंसर स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा का पता चला। बीमारी से जूझने के बावजूद उन्होंने मार्च 2017 में अपने नाटक संस ऑफ बाबर का मंचन किया। आखिरकार 29 सितंबर 2017 को यह बहुमुखी कलाकार इस दुनिया को अलविदा कह गया।

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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