मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
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समान नागरिक संहिता को लेकर तेज हुई राजनीति
मध्य प्रदेश में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लागू करने की प्रक्रिया ने जोर पकड़ लिया है। राज्य सरकार आगामी विधानसभा के मानसून सत्र में इसे विधेयक के रूप में पेश करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि यह कानून विवाह, तलाक, संपत्ति के उत्तराधिकार और गोद लेने की प्रक्रिया को लेकर सभी नागरिकों के लिए एक समान नियम सुनिश्चित करेगा। इस मसौदे को तैयार करने की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति को सौंपी गई है, जो लगातार जनता और धार्मिक संगठनों से सुझाव ले रही है।
महिलाओं की सुरक्षा का संकल्प
भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस कानून का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे बेटियों के सम्मान और बच्चों की सुरक्षा से जोड़ दिया है। उनका कहना है कि UCC का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकार दिलाना है। शर्मा के अनुसार, इस कानून के लागू होने के बाद मुस्लिम महिलाएं भी बेहतर और सुरक्षित जीवन व्यतीत कर सकेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी तक आए सुझावों में 71 प्रतिशत राय महिलाओं की तरफ से आई है, जो इसे एक क्रांतिकारी बदलाव बनाती है।
कानून तोड़ने पर 10 साल की जेल
विधायक ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जो लोग इस कानून के नियमों का पालन नहीं करेंगे, उन्हें दंडित किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि सरकार इस कानून के तहत 10 साल की जेल का प्रावधान लाने की तैयारी कर रही है। शर्मा ने कहा कि बेटियों की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राम और सरकार का प्रहार
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार द्वारा आदिवासियों को लेकर दिए गए बयानों पर पलटवार करते हुए रामेश्वर शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के नेता केवल आलाकमान को खुश करने की राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने राम मंदिर और कांग्रेस के दृष्टिकोण पर तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के मन में भगवान राम को लेकर नकारात्मकता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भगवान राम और प्रदेश सरकार, दोनों ही दोषियों को दंडित करने का कार्य करेंगे।
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