कामाख्या मंदिर में अंबुवाची मेले की शुरुआत: आज रात से तीन दिन बंद रहेंगे कपाट, जानें क्या है इसका महत्व धर्म एक महीने पहले 48
कामाख्या मंदिर में वार्षिक अंबुवाची मेले का आयोजन शुरू हो गया है, जिसके तहत आज रात देवी के रजस्वला काल की शुरुआत होगी और अगले तीन दिनों तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे।

अंबुवाची मेला और रजस्वला काल की शुरुआत

गुवाहाटी के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर में हर वर्ष आषाढ़ माह में आयोजित होने वाला अंबुवाची मेला सोमवार से शुरू हो गया है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, 22 जून को रात 9 बजकर 8 मिनट 42 सेकंड पर 'प्रवृत्ति' अनुष्ठान के साथ ही मां कामाख्या के वार्षिक रजस्वला काल का आरंभ माना जाएगा। इस दौरान मंदिर के कपाट पूरी तरह से बंद रहेंगे और गर्भगृह में किसी भी श्रद्धालु का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। यह मेला 26 जून को 'निवृत्ति' अनुष्ठान के बाद संपन्न होगा।

शक्ति साधना का प्रमुख केंद्र

नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है और इसे देश के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि यहां देवी सती का योनिभाग गिरा था, जिसके कारण यह स्थान तंत्र साधना और शक्ति उपासना का मुख्य केंद्र माना जाता है। अंबुवाची मेले के दौरान यहां देश-विदेश से आठ लाख से अधिक साधु, तीर्थयात्री और पर्यटक जुटते हैं, जो इसे पूर्वी भारत के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक बनाता है।

रजस्वला काल का आध्यात्मिक महत्व

तांत्रिक परंपराओं में देवी कामाख्या के रजस्वला काल को स्त्री शक्ति, सृजन और उर्वरता का प्रतीक माना गया है। इस समय को देवी की दिव्य ऊर्जा के जागरण का काल कहा जाता है। मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस तीन दिवसीय अवधि में देवी के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए सभी प्रकार की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान स्थगित कर दिए जाते हैं।

मंदिर के कपाट खुलने की प्रक्रिया

26 जून की सुबह 'निवृत्ति' अनुष्ठान और पारंपरिक नित्य पूजा के संपन्न होने के बाद मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दोबारा खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने के बाद भक्तों को दर्शन की अनुमति मिलेगी। इस समय श्रद्धालुओं के बीच पवित्र 'अंगोदक' और 'अंगवस्त्र' का वितरण किया जाएगा, जिसे बहुत शुभ और कल्याणकारी माना जाता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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