उपनाम: पर्यावरण
दिल्ली चिड़ियाघर में हिरणों की भीड़, क्षमता से तीन गुना अधिक पहुंची संख्या
दिल्ली के चिड़ियाघर में जानवरों की तादाद तय सीमा से कहीं ज्यादा हो गई है, जिससे प्रबंधन के सामने जगह की कमी और जानवरों की आपसी लड़ाई जैसी नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
थार रेगिस्तान में जीवन की उम्मीद बनीं 'बेरियां', जल संकट दूर करने के लिए शुरू हुआ खास अभियान
बाड़मेर जिले में थार की पारंपरिक जल संरचनाओं बेरियों को बचाने की मुहिम शुरू की गई है, ताकि भीषण गर्मी में लोगों और वन्यजीवों को पानी मिल सके।
दरभंगा की ग्रीन रोड: तपती गर्मी में भी स्वर्ग जैसा एहसास, शहर से 5 डिग्री कम रहता है तापमान
बिहार के दरभंगा में एक ऐसी सड़क है, जो चिलचिलाती धूप में भी मुसाफिरों को ठंडक का अहसास कराती है। बरगद और नीम के घने पेड़ों से ढकी यह सड़क न सिर्फ राहत देती है, बल्कि मिथिलांचल की लाइफलाइन भी मानी जाती है।
बीकानेर का 230 साल पुराना ऐतिहासिक फैसला: जब खेजड़ी के पेड़ों को काटने पर लगाया जाता था भारी जुर्माना
साल 1794 में बीकानेर रियासत ने पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की थी, जहां खेजड़ी के पेड़ों को काटने पर आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया था।
देवभूमि पर प्लास्टिक का संकट: पर्यटकों की लापरवाही से पहाड़ों और ग्लेशियरों पर मंडरा रहा खतरा
उत्तराखंड में पर्यटकों की बढ़ती संख्या से आर्थिक लाभ तो हो रहा है, लेकिन पहाड़ों पर फैलाया जा रहा कचरा पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
थार के तपते रेगिस्तान में संजीवनी बनीं सदियों पुरानी बेरियां, जल संकट से निपटने के लिए शुरू हुई खास मुहिम
बाड़मेर के रेगिस्तानी इलाकों में पारंपरिक जल स्रोतों यानी बेरियों को पुनर्जीवित करने का काम जोरों पर है, जिससे भीषण गर्मी में ग्रामीणों और वन्यजीवों को बड़ी राहत मिल रही है।
जंगल का रक्षक: जानिए क्यों ब्लैक ड्रोंगो को कहा जाता है पक्षियों का कोतवाल
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में पाए जाने वाले ब्लैक ड्रोंगो पक्षी अपनी सतर्कता और अनोखी आवाज के लिए मशहूर हैं। ये न केवल खुद को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि अपनी चेतावनी भरी आवाज से अन्य पक्षियों को भी शिकारी जानवरों से बचाते हैं।
मोर सांप क्यों खाता है? इसके पीछे की हैरान कर देने वाली वजह जानकर रह जाएंगे दंग
सागर के बांदरी महाविद्यालय के विशेषज्ञों ने मोर के खान-पान और उनकी आदतों से जुड़े कई अनसुने और रोचक तथ्य सामने रखे हैं।
Gopal Sahni की यादें और 100 साल पुराना बरगद का पेड़, जो आज भी गांव वालों के लिए है संजीवनी
पूर्वी चंपारण में स्थित एक सदी पुराना बरगद का पेड़ आज भी भीषण गर्मी में लोगों को राहत देता है। इस पेड़ को गोपाल Sahni ने लगाया था, जो अब हमारे बीच नहीं रहे।
जामुन की लकड़ी से बनती है सबसे मजबूत नाव, 5 साल तक नहीं सड़ती, पानी भी रहता है साफ
जामुन की लकड़ी का उपयोग नाव बनाने में किया जाता है, जो कि मजबूती और टिकाऊपन के लिए प्रसिद्ध है। यह लकड़ी पानी को साफ रखने में भी मदद करती है और लगभग पांच साल तक सड़ती नहीं है।
ठंड के लिए मशहूर मैनपाट अब गर्मी की चपेट में, 40 डिग्री तापमान से लोग परेशान
छत्तीसगढ़ का शिमला कहलाने वाला मैनपाट कभी अपनी ठंडी आबोहवा के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहां तापमान करीब 40 डिग्री तक पहुंच गया है। बढ़ती गर्मी से लोग एसी-कूलर अपनाने को मजबूर हैं और पर्यटन व स्थानीय कारोबार पर भी असर पड़ा है।
बाजार के केमिकल साबुन-शैम्पू पर भारी पड़ रहा पहाड़ का 'रामबास', नहाने से कपड़े धोने तक हर काम में असरदार
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के दानपुर क्षेत्र में ग्रामीण और भेड़ पालक आज भी नहाने, बाल धोने और कपड़े साफ करने के लिए रामबास नाम के प्राकृतिक पौधे का इस्तेमाल करते हैं, जो त्वचा, बालों और पर्यावरण तीनों के लिए सुरक्षित माना जाता है।
चूहों के बिल या किसी बड़ी आपदा की आहट? नैनीताल की पहाड़ियों में बढ़ती गतिविधि से सहमे लोग
नैनीताल की पहाड़ियों में चूहों की बढ़ती तादाद और उनके बड़े बिलों ने भूस्खलन का खतरा पैदा कर दिया है। इस अनोखी मुसीबत से निपटने के लिए नगरपालिका कृषि और उद्यान विभाग के साथ मिलकर योजना बना रही है।