उपनाम: पर्यावरण
जलवायु फंड को लेकर जर्मनी में बरसे पीयूष गोयल, विकसित देशों के वादों पर उठाए तीखे सवाल
बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अमीर देशों को जमकर खरी-खोटी सुनाई और कहा कि जलवायु परिवर्तन के लिए किए गए वादे पिछले 11 साल से कागजों तक ही सीमित हैं।
प्रशांत महासागर की गहराइयों में मिला रहस्यों का संसार, वैज्ञानिकों ने खोजे 12 हजार अज्ञात वायरस
प्रशांत महासागर के सुदूर इलाकों में शोधकर्ताओं को 12 हजार से अधिक ऐसे वायरस मिले हैं जिन्हें वैज्ञानिक 'एलियन' कह रहे हैं। ये सूक्ष्म जीव समुद्र की पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन अब इनका अस्तित्व खनन गतिविधियों के कारण खतरे में...
उत्तराखंड का राज्य पक्षी मोनाल संकट में, तेजी से सिमटता आवास और बदलती आवाज चिंता का विषय
उत्तराखंड के राज्य पक्षी मोनाल के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु परिवर्तन के कारण न केवल इनका प्राकृतिक आवास सिमट रहा है, बल्कि इनकी आवाज में भी बदलाव देखा गया है।
उत्तराखंड के जंगलों में एक सूक्ष्म कीट ने मचाई तबाही, 20 हजार से ज्यादा साल के पेड़ों पर मंडरा रहा खतरा
उत्तराखंड के देहरादून और कालसी के जंगलों में साल बोरर नामक खतरनाक कीट के कारण वन विभाग ने आपातकालीन अभियान शुरू किया है। इस जैविक आपदा से निपटने के लिए अब तक चार लाख से अधिक कीड़ों को नष्ट किया जा चुका है।
गाजर घास का बढ़ता खतरा: एक पौधा छोड़ रहा 25 हजार बीज, खेती और सेहत पर मंडराया संकट
सीकर में गाजर घास का तेजी से बढ़ता फैलाव न केवल फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि इंसानी सेहत के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुका है।
हाथी क्यों छोड़ रहे हैं जंगल और पहुंच रहे हैं इंसानी बस्तियों तक? पलामू के विशेषज्ञ ने बताई बड़ी वजह
जंगलों से हाथियों के गांवों की तरफ रुख करने के पीछे की वजहों का पलामू के विशेषज्ञ ने खुलासा किया है, साथ ही बचाव के लिए अहम सुझाव भी दिए हैं।
पितृ पक्ष में गायब हो रहे कौवे: अंबिकापुर में पक्षियों की घटती आबादी से बढ़ी चिंता, जानिए इसके बड़े कारण
छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में कौवों की संख्या में आई भारी कमी से लोग चिंतित हैं। पितृ पक्ष के दौरान कौवों के दर्शन दुर्लभ होने के पीछे पर्यावरण में आए बदलाव और मानवीय हस्तक्षेप को मुख्य जिम्मेदार माना जा रहा है।
केदारनाथ में गंदगी का अंबार: महज 5 महीनों में निकला 50.30 टन कचरा, पिछले साल के मुकाबले ढाई गुना ज्यादा
उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच कचरे का प्रबंधन बड़ी चुनौती बन गया है। इस साल के शुरुआती पांच महीनों में ही पिछले तीन वर्षों के कुल कचरे से अधिक गंदगी जमा हो गई है।
कूनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीते गौरव की मौत, डिहाइड्रेशन और कमजोरी ने ली जान
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक दुखद समाचार आया है जहाँ नामीबिया से लाए गए चीते गौरव की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।
ब्रह्मपुत्र पर चीन का विशाल बांध: भारत के सामने कौन सी बड़ी चुनौतियां और विशेषज्ञ की सलाह?
चीन तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर एक बड़ा जलविद्युत बांध बना रहा है, जिसे लेकर भारत में सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ गई हैं। रणनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन मुद्दों को मजबूती से उठाने का सुझाव दिया है।
पौधों के लिए जलभराव बन सकता है जानलेवा, पूसा संस्थान के विशेषज्ञ ने बताई बचाव की विधि
अत्यधिक पानी के कारण पेड़-पौधों की जड़ों तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे उनका विकास रुक जाता है और वे सूखने लगते हैं। पूसा संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों ने गमलों और बगीचों में जल निकासी को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है।
पराली नहीं बनेगी प्रदूषण का कारण, अब पंजाब के खेतों में पराली से होगी आलू की शानदार पैदावार
पंजाब में पराली जलाने की समस्या और उससे दिल्ली में होने वाले प्रदूषण से जल्द ही मुक्ति मिल सकती है। वैज्ञानिकों ने पराली में ही आलू उगाने की तकनीक विकसित की है जिससे किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी और पानी की भी भारी बचत होगी।
कराची में फैली रहस्यमयी बदबू से लोग परेशान, आखिर हवा में मछली जैसी गंध क्यों घुली?
पाकिस्तान के कराची शहर में अचानक हवा में मछली जैसी तीव्र बदबू फैलने से निवासियों में हड़कंप मच गया है। विशेषज्ञों ने इसके पीछे प्राकृतिक समुद्री प्रक्रिया और प्रतिकूल मौसमी स्थितियों को प्रमुख कारण बताया है।
ठाणे में डेटा सेंटर और रिंग मेट्रो परियोजना पर आदित्य ठाकरे का बड़ा हमला, बोले- 5 लाख लीटर डीजल का भंडारण शहर के लिए खतरा
शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने ठाणे में प्रस्तावित डेटा सेंटर और रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने पर्यावरण को नुकसान और जनस्वास्थ्य के लिए खतरे का हवाला देते हुए इसे अनुचित बताया है।
प्लास्टिक के दौर में भी नहीं टूटी बांसफोड़ परिवारों की जिद, कोडरमा में हुनर से जिंदा रखी है पुश्तैनी परंपरा
कोडरमा में बांसफोड़ समुदाय के 30 से 40 परिवार प्लास्टिक की बढ़ती चुनौतियों के बावजूद अपनी पारंपरिक कला को जिंदा रखे हुए हैं। बेहद कम कमाई होने के बावजूद ये लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ीगत हुनर के जरिए पर्यावरण के अनुकूल बांस के सामान बनाकर जीवन यापन कर रहे हैं।