चूहों के बिल या किसी बड़ी आपदा की आहट? नैनीताल की पहाड़ियों में बढ़ती गतिविधि से सहमे लोग उत्तराखंड 2 घंटे पहले 3
नैनीताल की पहाड़ियों में चूहों की बढ़ती तादाद और उनके बड़े बिलों ने भूस्खलन का खतरा पैदा कर दिया है। इस अनोखी मुसीबत से निपटने के लिए नगरपालिका कृषि और उद्यान विभाग के साथ मिलकर योजना बना रही है।

उत्तराखंड की मनोरम सरोवर नगरी नैनीताल इन दिनों एक अनोखी मुसीबत से जूझ रही है। शहर में चूहों की लगातार बढ़ती संख्या ने यहां के निवासियों के साथ-साथ प्रशासन की नींद उड़ा दी है। पहाड़ी ढलानों पर इन चूहों की बढ़ती हलचल को लेकर लोगों में भय का माहौल है।

बड़े बिलों से गहराई चिंता

शहर के संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों और शेर का डांडा वार्ड में चूहे बड़े-बड़े बिल बना रहे हैं। इन्हें देखकर आशंका जताई जा रही है कि ये बिल पहाड़ियों को भीतर से खोखला कर सकते हैं, जिससे भूस्खलन का खतरा और बढ़ सकता है। स्थानीय लोगों को डर है कि यह स्थिति आगे चलकर किसी बड़ी तबाही का रूप ले सकती है।

आबादी की ओर क्यों भागे चूहे

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार जंगलों में लगी आग और बलिया नाले पर चल रहे काम की वजह से चूहे अपने प्राकृतिक ठिकाने छोड़कर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। यही कारण है कि शहरी क्षेत्रों में इनकी मौजूदगी तेजी से बढ़ी है।

समाधान की तैयारी

इस असामान्य समस्या से पार पाने के लिए नैनीताल नगरपालिका ने कमर कस ली है। नगरपालिका अब कृषि एवं उद्यान विभाग के साथ मिलकर एक विशेष योजना तैयार कर रही है, ताकि चूहों की इस बढ़ती संख्या पर काबू पाया जा सके और पहाड़ियों को संभावित खतरे से बचाया जा सके।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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